अफगान पर कब्जा करने के बाद भी सरकार क्यों नहीं बना रहा तालिबान? जानिए किसका कर रहा इंतजार

काबुल पर कब्जा किए तालिबान को तकरीबन पांच दिन हो गए हैं, लेकिन अब तक नई सरकार का गठन नहीं किया गया है.

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तालिबान (रॉयटर्स) तालिबान (रॉयटर्स)

aajtak.in

  • काबुल,
  • 21 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 12:09 AM IST
  • 31 अगस्त तक का इंतजार कर रहा तालिबान
  • तालिबान ने अमेरिका से किया है समझौता

ज्यादातर अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान ने पिछले दिनों पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद पूरे देश में हिसंक घटनाएं शुरू हो गई हैं. महिलाओं, बच्चों में काफी डर है और बड़ी संख्या में लोग जल्द-से-जल्द अफगानिस्तान छोड़ देना चाहते हैं. काबुल एयरपोर्ट पर भारी भीड़ इकट्ठा हो रही है. काबुल पर कब्जा किए तालिबान को तकरीबन पांच दिन हो गए हैं, लेकिन अब तक नई सरकार का गठन नहीं किया गया है.

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तालिबान के साथ बातचीत से परिचित एक अफगान अधिकारी ने जानकारी दी है कि कट्टरपंथी समूह की आगामी सरकार के बारे में कोई निर्णय या घोषणा करने की योजना नहीं अभी नहीं है. तालिबान 31 अगस्त तक का इंतजार कर रहा है, जब तक अमेरिकी सैनिक पूरी तरह वापस चले जाएंगे.

अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर न्यूज एजेंसी एपी को बताया कि तालिबान के प्रमुख वार्ताकार अनस हक्कानी ने अपने पूर्व सरकारी वार्ताकारों से कहा है कि अंतिम वापसी की तारीख बीतने तक विद्रोही गुट ने अमेरिका के साथ कुछ भी नहीं करने का समझौता किया है. अधिकारी ने विस्तार से नहीं बताया कि क्या कुछ न करने का संदर्भ केवल राजनीतिक क्षेत्र के लिए था. 

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हक्कानी का बयान इस बात को लेकर चिंता पैदा कर रहा है कि 31 अगस्त के बाद आंदोलन की क्या योजना होगी और क्या वे अगली सरकार में गैर-तालिबान अधिकारियों को शामिल करने का अपना वादा निभाएंगे. बता दें कि अब तक तालिबान ने अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बलों को बदलने की अपनी योजनाओं के बारे में कुछ नहीं बताया है.

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने शुक्रवार रात को अफगानिस्तान मसले पर संबोधित किया. उन्होंने कहा कि अफगान से 18 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है. अफगान से लोगों को निकाला जा रहा और इसके लिए फ्लाइट्स की संख्या बढ़ाई गई है. बाइडन ने कहा कि काबुल में इस समय अमेरिका के छह हजार सैनिक मौजूद हैं और किसी भी हमले का अमेरिका ताकत से जवाब देगा. उन्होंने नाटो देशों का भी अमेरिका को समर्थन मिलने का दावा किया.

 

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