अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक अदद इच्छा है कि उन्हें शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा जाए. दुनियाभर में आठ युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले ट्रंप को यकीन था कि 2025 का नोबेल पुरस्कार उन्हें मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरेना मचाडो के शांति पीस का नोबेल जीता. ट्रंप ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि अगर मचाडो चाहे तो वह अपना नोबेल उन्हें दे सकती हैं लेकिन अब इस पर नोबेल पुरस्कार समिति की प्रतिक्रिया सामने आई है.
नॉर्वे की नोबेल समिति ने साफ किया है कि नोबेल प्राइज किसी को सौंपा नहीं जा सकता. समिति ने कहा कि एक बार नोबेल शांति पुरस्कार घोषित हो जाने के बाद उसे न तो वापस लिया जा सकता है, न किसी को सौंपा जा सकता है और न ही दूसरों के साथ साझा किया जा सकता है. यह फैसला अंतिम होता है और हमेशा के लिए वैध रहता है.
बता दें कि नोबेल समिति का यह बयान तब आया, जब हाल ही में मचाडो ने कहा था कि वह अपने नोबेल पीस प्राइज को ट्रंप को देना या उनके साथ साझा करना चाहती हैं.
मचाडो ने सोमवार को फॉक्स न्यूज के होस्ट शॉन हैनिटी से कहा कि मैं निश्चित रूप से व्यक्तिगत रूप से उन्हें यह बताना चाहूंगी कि हम वेनेजुएला के लोग, क्योंकि यह पुरस्कार वेनेजुएला की जनता का है, इसे उन्हें देना और उनके साथ साझा करना चाहते हैं. उन्होंने जो किया है वह ऐतिहासिक है. यह लोकतांत्रिक दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है.
पुरस्कार की घोषणा के तुरंत बाद मचाडो ने इसे ट्रंप और वेनेजुएला के लोगों को समर्पित किया था. ट्रंप लंबे समय से खुद नोबेल पुरस्कार पाने की इच्छा जता चुके हैं और सत्ता में वापसी के बाद उन्होंने इसके लिए खुलकर अभियान भी चलाया है. हालांकि, मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला के शासन को लेकर ट्रंप ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का समर्थन किया था.
ट्रंप ने मचाडो को बहुत अच्छी महिला बताया, लेकिन कहा कि फिलहाल वेनेजुएला के भीतर उन्हें शासन चलाने के लिए पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं है. उन्होंने गुरुवार को हैनिटी से कहा कि मचाडो अगले सप्ताह दौरे पर आने वाली हैं.
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