अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर तीखा हमला बोला है. बेसेंट ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह डील दिखाती है कि यूरोपियन यूनियन ने यूक्रेन के लोगों के लिए अपने बताए गए समर्थन के बजाय कमर्शियल हितों को प्राथमिकता दी है.
सीएनबीसी (CNBC) से बातचीत में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वह यूरोपीय संघ के फैसले से बेहद निराश हैं. उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ यूरोप यूक्रेन के प्रति समर्थन की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ वह भारत के साथ 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (Mother of All Deals) कर रहा है, जो रूसी तेल का उपयोग कर रहा है.
बेसेंट ने कहा, "उन्हें वही करना चाहिए जो उनके लिए सबसे अच्छा हो. लेकिन मैं आपको बता दूं, मुझे यूरोपीय लोग बहुत निराशाजनक लगते हैं."
बेसेंट के अनुसार, यूरोप उन रिफाइंड उत्पादों को भारत से खरीद रहा है जो रूसी कच्चे तेल से बने हैं. बेसेंट ने खुलासा किया कि अमेरिका ने पिछले साल भारतीय सामानों पर जो 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे, यूरोपीय संघ उनमें शामिल होने के लिए तैयार नहीं था.
उन्होंने आरोप लगाया कि ईयू ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वे अपना खुद का व्यापार समझौता पूरा करना चाहते थे. अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के कारण अगस्त में टैरिफ की दरें बढ़ा दी थीं.
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भारत-EU समझौते के मायने
यह समझौता वैश्विक व्यापार तनाव के बीच अमेरिका पर यूरोप की निर्भरता कम करने के उद्देश्य से किया गया है. इसके तहत लगभग 97% वस्तुओं पर टैरिफ कम या खत्म हो जाएंगे, जिससे 2032 तक यूरोपीय निर्यात दोगुना होने की उम्मीद है. हालांकि, बेसेंट ने संकेत दिया कि यदि भारत रूसी तेल की खरीद कम करता है, तो अमेरिका टैरिफ हटाने के रास्ते पर विचार कर सकता है.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया है। इस डील के तहत करीब 97 फीसदी उत्पादों पर टैरिफ घटाने या खत्म करने की योजना है. बेसेंट का यह बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान अटलांटिक पार ट्रेड संबंधों में तनाव के माहौल के बीच आया है. अमेरिकी अधिकारी इस बात से निराश हैं कि EU ने जुलाई में वाशिंगटन के साथ हुए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के तहत किए गए टैरिफ में कमी को लागू नहीं किया है.
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