स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर US ने खड़े किए हाथ! ईरान के चैलेंज के बीच अमेरिकी ऊर्जा मंत्री का बड़ा बयान

ईरानी सेना के अधिकारी ने चुटकी लेते हुए अमेरिकी नौसेना चैलेंज किया था कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करे. अब अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि मौजूदा जोखिम बहुत अधिक है और नौसेना की सुरक्षा अभी संभव नहीं है.

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Strait of Hormuz में सैकड़ों जहाज फंसे हैं (File Photo- ITG) Strait of Hormuz में सैकड़ों जहाज फंसे हैं (File Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:04 PM IST

ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मानी जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका ने बड़ी स्वीकारोक्ति दी है. अमेरिकी नौसेना ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा (Escort) देने की स्थिति में नहीं है.

यह स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों से अलग नजर आती है. ट्रंप ने कुछ दिन पहले कहा था कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए नेवी एस्कॉर्ट उपलब्ध कराएगा. बुधवार को ही ट्रंप ने तेल कंपनियों से बिना डरे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल टैंकरों को निकालने की सलाह दी थी.

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लेकिन अब अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि मौजूदा जोखिम बहुत अधिक है और नौसेना की सुरक्षा अभी संभव नहीं है. इससे पहले ईरानी सेना के अधिकारी ने चुटकी लेते हुए अमेरिकी नौसेना को चैलेंज दिया था कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करे.

दरअसल, शिपिंग उद्योग की ओर से लगभग रोजाना किए जा रहे अनुरोधों के बावजूद अमेरिकी नौसेना का कहना है कि मौजूदा हालात में हमलों का खतरा इतना ज्यादा है कि अभी सैन्य सुरक्षा देना संभव नहीं है. सूत्रों के मुताबिक नौसेना ने शिपिंग और तेल कंपनियों के साथ नियमित ब्रीफिंग में यह साफ कर दिया है कि जब तक हमलों का जोखिम कम नहीं होता, तब तक एस्कॉर्ट मिशन शुरू नहीं किया जाएगा.

इस रूट से गुजरता है दुनिया का 20% तेल

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बता दें कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. यह वही जलमार्ग है, जिससे होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति गुजरती है. ईरानी सेना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया गया है और जो भी जहाज यहां से गुजरने की कोशिश करेगा, उस पर हमला किया जाएगा. पिछले दिनों कई जहाजों पर हमले भी हो चुके हैं.

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री का बड़ा बयान

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी साफ संकेत दिया है कि फिलहाल नौसेना एस्कॉर्ट संभव नहीं है. उनका कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान तभी होगा जब ईरान की उस क्षमता को खत्म किया जाए, जिससे वह अपने पड़ोसी देशों और समुद्री मार्गों को धमकी देता है. उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि यदि सैन्य कार्रवाई की जरूरत पड़ी तो यह कई हफ्तों तक चल सकती है, हालांकि महीनों तक नहीं.

सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में राइट ने कहा, 'यह अपेक्षाकृत जल्द हो सकता है, लेकिन अभी नहीं. हम फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं हैं. इस समय अमेरिकी सैन्य संसाधनों का मुख्य फोकस ईरान की सैन्य क्षमताओं और उन औद्योगिक ढांचों को निशाना बनाने पर है, जो उसके आक्रामक हथियारों के निर्माण में मदद करते हैं.'

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राइट के मुताबिक अमेरिकी रणनीति फिलहाल ईरान की आक्रामक क्षमता और हथियार निर्माण तंत्र को कमजोर करने पर केंद्रित है, ताकि भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे को कम किया जा सके.

ईरानी अधिकारी ने अमेरिका से ली थी चुटकी

ईरान की IRGC नौसेना के कमांडर अलिरेजी तंगसीरी ने कुछ दिन पहले चुटकी लेते हुए कहा था कि अगर कोई तेल टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना चाहता है तो वह पहले किसी अमेरिकी विध्वंसक जहाज को साथ लेकर आए. तेहरान टाइम्स की एक्स पोस्ट के मुताबिक, तंगसीरी ने तंज भरे लहजे में कहा था कि जो भी जहाज अमेरिकी युद्धपोत को साथ लेकर यहां से गुजरने की हिम्मत करेगा, उसकी सुरक्षा की गारंटी ईरान देगा. इस बयान को ट्रंप की हालिया घोषणा पर तंज और अप्रत्यक्ष धमकी के रूप में देखा गया.

गौरतलब है कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी सऊदी अरामको ने चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रही तो वैश्विक तेल बाजार पर इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं. वहीं समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस जलमार्ग को सुरक्षित करना बेहद मुश्किल है.

ईरान के पास समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने, ड्रोन और तेज रफ्तार नौकाओं से हमला करने की क्षमता है, जिससे किसी भी एस्कॉर्ट मिशन को भारी खतरा हो सकता है. इसी वजह से सैकड़ों जहाज फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में लंगर डाले इंतजार कर रहे हैं और वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है.

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