US-Israel-Iran War Live Updates: 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ अमेरिका-इजरायल-ईरान के युद्ध को अब 33 दिन हो चुके हैं. तीन देशों से शुरू हुई इस जंग की चपेट में कई अरब देश भी आ गए. इस बीच सीरिया ने जंग में शामिल होने को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है.
सीरियाई राष्ट्रपति ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर बड़ा बयान दिया है. राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने साफतौर पर कह दिया है कि सीरिया इस लड़ाई में कूदने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने कहा जब तक कि सीरिया पर सीधा कोई हमला नहीं होता, तब तक सीरिया इस युद्ध से दूरी बनाए रखेगा.
राष्ट्रपति ने ये भी बताया कि युद्ध में उतरने का फैसला तभी लिया जाएगा जब हमारे पास कोई राजनयिक समाधान नहीं बचेगा.
अल-जज़ीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की राजधानी तेहरान के कई इलाकों पर इजरायली हमलों के बाद शहर में धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं. रिपोर्ट में IRIB ब्रॉडकास्टर के सूत्रों का हवाला दिया गया है.
अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इज़रायल ने यमन से दागी गई मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर दिया है.
अल-जज़ीरा ने ईरान की न्यूज़ एजेंसी IRNA के सूत्रों के हवाले से बताया कि US और इजरायल की सेनाओं के संयुक्त हवाई हमलों में ईरान की एक दवा फैक्ट्री को निशाना बनाया गया. इस फैक्ट्री की पहचान 'तोफ़ीक़ दारू फ़ार्मास्यूटिकल' के तौर पर हुई है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान में मौजूद इस फैक्ट्री की एक तस्वीर X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "इजरायल के युद्ध अपराधी अब खुलेआम और बेशर्मी से दवा कंपनियों पर बमबारी कर रहे हैं."
हज़ारों अमेरिकी सैनिक मिडिल-ईस्ट की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने ज़ोर देकर कहा है कि ईरान के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है और साथ ही यह भी धमकी दी है कि अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो युद्ध को और बढ़ाया जा सकता है.
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि विमानवाहक पोत USS जॉर्ज HW बुश मंगलवार को तैनात किया गया और इसे तीन डिस्ट्रॉयर जहाज़ों के साथ मध्य-पूर्व भेजा जाना है. इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में 6,000 से ज़्यादा नौसैनिक शामिल हैं.
यह ऐसे वक्त में हो रहा है, जब 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के हज़ारों सैनिक भी मध्य-पूर्व में पहुंचना शुरू हो गए हैं. यह जानकारी दो अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने दी, जिन्होंने, बाकी अधिकारियों की तरह ही, संवेदनशील सैन्य योजनाओं पर चर्चा करने के लिए अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बात की.
हालांकि, इन सैनिकों में से ज़्यादातर सैनिक जंग से पहले से ही तय की गई सेनाओं की अदला-बदली (रोटेशन) का हिस्सा हैं, लेकिन कुछ सैनिक उन करीब 1,500 पैराट्रूपर्स में से भी हैं, जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने पिछले हफ़्ते इस क्षेत्र में भेजने का फ़ैसला किया था.
ट्रंप प्रशासन ने यह नहीं बताया है कि ये सैनिक वहां क्या करेंगे, लेकिन 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न को दुश्मन के कब्ज़े वाले या विवादित इलाकों में पैराशूट से उतरकर, अहम इलाकों और हवाई अड्डों को सुरक्षित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. करीब 2,500 मरीन सैनिकों को लेकर जा रहा अमेरिकी नौसेना का एक जहाज़ हाल ही में मिडिल-ईस्ट पहुंचा है और 2,500 अन्य मरीन सैनिकों को कैलिफ़ोर्निया से भी भेजा जा रहा है.
अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर अंडरग्राउंड सैन्य ठिकानों पर सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों (Precision Munitions) से हमला किया है. इस कार्रवाई का मकसद ईरानी शासन की सैन्य शक्ति को कमजोर करना है, ताकि उसका सीमाओं के बाहर प्रभाव खत्म कर सके.
रूस के राजदूत के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इस समय ईरान में ही हैं, लेकिन वो सार्वजनिक रूप से सामने आने से बच रहे हैं. वहीं, अमेरिका का मानना है कि मोजतबा हमलों में घायल हुए हैं और शायद उनके चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं.
व्हाइट हाउस की मानें तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार रात 9 बजे (भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 6:30 बजे) ईरान के मुद्दे पर देश को संबोधित करेंगे. इस संबोधन में ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक निजी वित्त पोषित (Privately Funded) बॉलरूम बनाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत को खारिज कर दिया है. दरअसल संघीय जज ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी. मंगलवार (31 मार्च) को एक कार्यकारी आदेश समारोह के दौरान ट्रंप ने इस आदेश पर विरोध जताया.
ट्रंप ने तर्क दिया कि इस बॉलरूम के लिए 300 मिलियन से 400 मिलियन डॉलर का खर्च अमीर व्यक्तियों और कंपनियों के निजी दान से आ रहा है. इसमें करदाताओं का पैसा शामिल नहीं है, इसलिए कांग्रेस की इजाजत जरूरी नहीं है. राष्ट्रपति ने कहा कि बॉलरूम में इस्तेमाल होने वाला मजबूत मटेरियल व्हाइट हाउस की सुरक्षा जरूरतों के दायरे में आता है, जिसके निर्माण की इजाजत जज के आदेश में भी दी गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान छोड़ देगा. उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है. ट्रंप ने ईरान में 'रिजीम चेंज' का लक्ष्य पूरा होने का दावा भी किया.
ईरान के इस्फहान में स्थित मुबारके स्टील प्लांट को एक हफ्ते में दूसरी बार निशाना बनाया गया है. ये प्लांट ईरान के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में से एक है.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि इजरायल ईरानी खतरों से निपटने के लिए कई देशों के साथ नए गठबंधन बना रहा है. नेतन्याहू ने उन देशों के नाम या इस योजना की पूरी जानकारी तो नहीं दी, लेकिन इसे सुरक्षा के लिए जरूरी बताया.
इजरायली सेना ने लेबनान में शांति सैनिकों से जुड़ी घटना पर सफाई देते हुए कहा है कि उनके सैनिकों ने वहां कोई विस्फोटक उपकरण नहीं लगाया था. सेना का ये भी दावा है कि घटना के समय उस इलाके में उनके कोई भी सैनिक मौजूद नहीं थे. इस बयान के जरिए इजरायल ने शांति सैनिकों पर हुए हमले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इराक में कतैब हिजबुल्लाह से जुड़े एक व्यक्ति को इराकी अधिकारियों ने हिरासत में लिया है. माना जा रहा है कि ये व्यक्ति हाल ही में हुए अपहरण की घटना में शामिल था. सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले में आगे की जांच कर रही हैं ताकि अपहरण से जुड़ी और भी जानकारियां जुटाई जा सकें.
प्रधानमंत्री के सलाहकार और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. माजिद बिन मोहम्मद अल अंसारी ने बताया कि कतर ने पहले दिन से ही क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वो जंग बढ़ाने वाले किसी भी कदम का समर्थन नहीं करते. मंगलवार को मंत्रालय की मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, अल अंसारी ने कहा कि कतर फिलहाल अपनी संप्रभुता और क्षेत्र की रक्षा करने पर ध्यान दे रहा है. उन्होंने बताया कि कतर अपने ऊपर हो रहे हमलों का जवाब देने पर फोकस कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि कतर मध्यस्थता की कोशिशों में शामिल नहीं है, हालांकि, देश तनाव कम करने और युद्ध को खत्म करने के राजनयिक कोशिशों का समर्थन करता है.
सऊदी अरब के रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि वो मिडिल-ईस्ट संकट पर पैनी नजर रख रहे हैं और नागरिकों को सुरक्षा संबंधी अपडेट देते रहेंगे. जो अमेरिकी नागरिक इस क्षेत्र को छोड़ना चाहते हैं, उन्हें भी मदद के लिए अपडेट किया जाता रहेगा. बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री रुबियो के लिए अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है.