US-Israel-Iran War Live: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग चौथे हफ्ते में पहुंच गई है. मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. ईरान पर लगातार हमले हो रहे हैं, वहीं तेहरान भी जवाबी हमलों से पीछे नहीं हट रहा. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर ईरान पीछे नहीं हटता तो अमेरिका और कड़ा सैन्य एक्शन ले सकता है.
अमेरिका ने संघर्ष खत्म करने के लिए 15 शर्तों वाला प्रस्ताव भी भेजा है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण, प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन खत्म करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना शामिल है. हालांकि, ईरान ने इन शर्तों को मानने से इनकार करते हुए पांच मांगे रख दी हैं. ऐसे में जंग फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है. पल-पल के अपडेट के लिए जुड़े रहें इस लाइव ब्लॉग के साथ.
वेस्टर्न इंटेलिजेंस रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका-इजरायल के साथ जारी युद्ध में रूस ईरान की लगातार मदद कर रहा है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस अपने सहयोगी ईरान को घातक हथियारों के रूप में ड्रोन की आपूर्ति करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर चुका है. साथ ही दवाइयां और खाद्य सामग्री भी भेज रहा है. पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, मॉस्को ईरान को युद्ध में मजबूत बनाने के लिए यह सहायता दे रहा है.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इजरायल और अमेरिका के तेहरान पर हमलों के कुछ दिनों बाद ही रूसी और ईरानी वरिष्ठ अधिकारियों ने गुप्त रूप से ड्रोन आपूर्ति पर चर्चा शुरू कर दी थी. डिलीवरी की प्रक्रिया मार्च की शुरुआत में शुरू हुई और मार्च के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है.
कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में बड़े पैमाने पर चंदा जुटाया जा रहा है, जिसे लेकर खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. अभी तक कुल 17.91 करोड़ रुपये जकात और सदका के रूप में जुटाए गए हैं. पूरी खबर को यहां क्लिक कर पढ़ें - कश्मीर में ईरान के नाम पर चंदे की बाढ़... खुफिया एजेंसियां अलर्ट, फंड के गलत इस्तेमाल की आशंका
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर है. ईरान ने पांच देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है. साथ ही उन्होंने भारत समेत पांच मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का ऐलान किया है. यहां पढ़ें पूरी खबर...
ईरान ने युद्धविराम को लेकर नई शर्त रख दी है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने मध्यस्थ देशों को साफ कर दिया है कि लेबनान को भी किसी भी सीजफायर समझौते में शामिल किया जाए. साथ ही, इजरायल को हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपने हमले रोकने होंगे. सूत्रों के मुताबिक, ईरान चाहता है कि युद्ध सिर्फ उसके खिलाफ ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में मौजूद उसके सहयोगी समूहों के खिलाफ भी पूरी तरह खत्म हो. ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि रेजिस्टेंस ग्रुप्स पर भी हमला बंद हो.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब तक 8 युद्ध सुलझा चुका है और एक और युद्ध में जीत की ओर बढ़ रहा है. ट्रंप ने ईरान को लेकर कहा कि वह समझौता करना चाहता है, लेकिन खुलकर कहने से डर रहा है. उनके मुताबिक, 'ईरान डील करना चाहता है, लेकिन उन्हें डर है कि उनके अपने लोग उन्हें मार देंगे या हम उन्हें मार देंगे.'
उन्होंने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका जो कर रहा है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया. ट्रंप के अनुसार, ईरान के नेतृत्व में भी इस समय दबाव की स्थिति है और वहां के हालात बेहद अस्थिर हैं.
कुवैत में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिज्बुल्लाह से जुड़े 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. इन पर खाड़ी देशों के नेताओं की हत्या की साजिश रचने का आरोप है. कुवैत के गृह मंत्रालय के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में 5 कुवैती नागरिक शामिल हैं. मंत्रालय ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े 14 अन्य सदस्य देश छोड़कर फरार हो चुके हैं. इनमें 5 कुवैती, 5 ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी कुवैती नागरिकता पहले ही खत्म की जा चुकी है, जबकि 2 ईरानी और 2 लेबनानी नागरिक भी शामिल हैं.
मंत्रालय के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान जासूसी और एक आतंकी संगठन से जुड़े होने की बात कबूल की है. सभी आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास भेज दिया गया है. बताया जा रहा है कि यह साजिश खाड़ी क्षेत्र के नेताओं को निशाना बनाकर रची जा रही थी, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया. इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका के बदलते युद्ध के नैरेटिव पर तंज कसते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के अभियान का मकसद अब समझ में नहीं आ रहा है.
ख्वाजा आसिफ ने इशारा किया कि अब ऐसा लगता है कि सारा ध्यान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर है. 'X' (ट्विटर) पर उन्होंने लिखा, 'ऐसा लगता है कि युद्ध का मकसद अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना हो गया है, जो युद्ध शुरू होने से पहले ही खुला हुआ था.'
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अमेरिका के सैनिकों को बड़ा नुकसान हुआ है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध में अब तक करीब 290 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं.
CENTCOM के प्रवक्ता ने बताया कि इनमें से 255 सैनिक इलाज के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं. वहीं, 10 सैनिकों की हालत गंभीर बनी हुई है. बाकी 25 सैनिकों की स्थिति के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक और कड़ी चेतावनी जारी की है. ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालिबफ ने कहा है कि खुफिया जानकारी के मुताबिक दुश्मन एक क्षेत्रीय देश के सहयोग से ईरानी द्वीप पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं.
उन्होंने साफ कहा कि ईरानी सेना दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रख रही है. अगर किसी भी तरह का कदम उठाया गया, तो ईरान उस क्षेत्रीय देश के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार और तेज हमले करेगा. हालांकि, क़ालिबाफ ने उस देश का नाम नहीं बताया, लेकिन इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है.
अमेरिका ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने कहा कि अगर तेहरान हार स्वीकार नहीं करता तो राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर और बड़ा हमला करने को तैयार करें. उन्होंने कहा, 'ट्रंप ब्लफ नहीं करते, ईरान को गलत आकलन नहीं करना चाहिए. अगर उसने हालात नहीं समझे, तो उसे पहले से भी ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा.'