ईरान-US में बनेगी बात? परमाणु और अन्य मुद्दों को अलग रखने की मांग, जिनेवा में तीसरे दौर की चर्चा

ईरान और अमेरिका के बीच दशकों पुराने परमाणु विवाद को सुलझाने के लिए जिनेवा में बातचीत का सिलसिला तेज हो गया है. एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने इशारा किया है कि अगर वॉशिंगटन परमाणु और गैर-परमाणु मुद्दों को अलग-अलग रखे, तो एक समझौते का ढांचा तैयार किया जा सकता है.

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यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल प्रोग्राम पर विवाद (Photo: ITG) यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल प्रोग्राम पर विवाद (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:29 AM IST

ईरान और अमेरिका के बीच जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता से तीसरे दौर की अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची, अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर के बीच गुरुवार को 'गंभीर' चर्चा हुई. ईरानी अधिकारी ने बताया कि अगर अमेरिका परमाणु कार्यक्रम और अन्य राजनीतिक मुद्दों को अलग कर दे, तो समझौते की रूपरेखा तैयार हो सकती है. 

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यह बातचीत ऐसे वक्त में हो रही है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 से 15 दिनों के भीतर समझौता न होने पर 'बहुत बुरा' होने की चेतावनी दी है. 

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने इजरायल के पास अपना सबसे बड़ा विमानवाहक पोत तैनात कर दिया है, जिससे युद्ध की आशंकाएं भी गहरा गई हैं.

'गंभीर' बातचीत और नए विचारों पर मंथन

ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र अल्बुसैदी ने कहा कि दोनों पक्ष 'रचनात्मक और सकारात्मक विचार' साझा कर रहे हैं. हालांकि, ईरानी अधिकारी ने कहा कि अभी भी कुछ मतभेद बाकी हैं, जिन्हें कम करने की जरूरत है. जिनेवा में इस हफ्ते एक मसौदे (टेक्स्ट) पर काम किया जा रहा है. जानकारों का मानना है कि गुरुवार को ब्रेक के बाद फिर से बातचीत शुरू होना इस बात का संकेत है कि प्रगति की गुंजाइश अभी खत्म नहीं हुई है.

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यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल प्रोग्राम पर विवाद

वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद कर दे, जिससे वह परमाणु बम न बना सके. वहीं, ईरान ने बम बनाने की इच्छा से इनकार किया है और लचीलापन दिखाने का वादा किया है. विवाद की बड़ी वजह यह है कि अमेरिका बातचीत में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों को उसके समर्थन को भी जोड़ना चाहता है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान की मिसाइलें अमेरिका पर हमले के लिए बनाई गई हैं और यह एक 'बड़ी समस्या' है.

ट्रंप की चेतावनी और सैन्य तैनाती

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी 'स्टेट ऑफ द यूनियन' स्पीच में राजनयिक समाधान को प्राथमिकता दी, लेकिन साफ किया कि वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं लेने देंगे. दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने सबसे बड़ा विमानवाहक पोत 'यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड' इजरायल की ओर रवाना कर दिया है और एक दर्जन एफ-22 लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. ट्रंप ने पिछली गर्मियों में इजरायल के साथ मिलकर ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला किया था और अब फिर से कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं.

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ईरान में बढ़ता आंतरिक संकट

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अपने 36 साल के कार्यकाल के सबसे बड़े संकट का सामना कर रहे हैं. प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और देश में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने खामेनेई के पुराने फतवे का हवाला देते हुए दोहराया है कि ईरान सामूहिक विनाश के हथियार विकसित नहीं करेगा. ईरान ने धमकी दी है कि अगर उस पर फिर हमला हुआ, तो वह इजरायल पर मिसाइलों की बौछार कर देगा.

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तनाव के बीच राजनयिक हल की उम्मीद

क्षेत्र में जंग की आशंका को देखते हुए कई देशों ने अपने राजनयिकों के परिवारों को वहां से निकालना शुरू कर दिया है. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अली वैज ने चेतावनी दी है कि अगर इस दौर में कोई सफलता नहीं मिली, तो संघर्ष का खतरा बढ़ जाएगा. हालांकि, दोनों पक्षों का टेबल पर बने रहना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. ईरान ने कहा है कि वह प्रतिबंध हटाने और यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार की मान्यता के बदले नई रियायतें देने को तैयार है.

 
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