संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बोले- कोरोना से आ गई है नफरत की सुनामी

एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि कोरोना की वजह से नफरत और बाहरी लोगों के भय या जेनोफोबिया की एक सुनामी सी आ गई है. इसे खत्म करने की जरूरत है.

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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (फाइल फोटो-PTI) संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (फाइल फोटो-PTI)

aajtak.in

  • संयुक्त राष्ट्र,
  • 08 मई 2020,
  • अपडेटेड 2:50 PM IST

  • कोरोना वायरस से दुनियाभर से बढ़ी नफरत
  • इसे खत्म करने की है जरूरत-संयुक्त राष्ट्र

कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर दुनिया कई मोर्चो पर लड़ रही है. वैश्विक स्तर पर लोग स्वास्थ्य के मोर्च पर कोरोना वायरस से लड़ रहे हैं तो वहीं कुछ को नफरतों का भी शिकार होना पड़ रहा है. ऐसी ही घटनाओं को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी चिंता जाहिर करते हुए आगाह किया है.

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एंटोनियो गुटेरेस ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना की वजह से नफरत और बाहरी लोगों के भय या जेनोफोबिया की एक सुनामी सी आ गई है. इसे खत्म करने के लिए पुरजोर कोशिश करने की जरूरत है.

जारी एक बयान में किसी देश का नाम लिए बिना गुटेरेस ने कहा, "महामारी की वजह से नफरत, जेनोफोबिया और आतंक फैलाने की बाढ़ सी आ गई है. इंटरनेट से लेकर सड़कों तक, हर जगह बाहरी लोगों के खिलाफ नफरत बढ़ गई है. यहूदी-विरोधी साजिश की थ्योरियां बढ़ गई हैं और कोरोना वायरस से संबंधित मुस्लिम-विरोधी हमले भी हुए हैं."

गुटेरेस ने कहा कि प्रवासियों और शरणार्थियों को "वायरस का स्रोत बता कर उनका तिरस्कार किया गया है, और फिर उसके बाद उन्हें इलाज से वंचित रखा गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इसी बीच घृणा से भरे मीम भी बन रहे हैं जो बताते हैं कि कोरोना वायरस को लेकर सबसे संवेदनशील बुजुर्ग सबसे ज्यादा बलि का बकरा बन रहे हैं.

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संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने यह बात भी स्वीकारी कि पत्रकारों, घोटालों और तमाम जुर्मों का पर्दाफाश करने वाले व्हिसल ब्लोअर, मेडिकल स्टाफ, राहतकर्मी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को महज उनका काम करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने अपील की है कि दुनियाभर में हेट स्पीच को खत्म करने के लिए पुरजोर कोशिश की जरूरत है. उन्होंने विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी को रेखांकित किया और कहा कि इन संस्थानों को युवाओं को "डिजिटल साक्षरता" की शिक्षा देनी चाहिए क्योंकि वे कैप्टिव दर्शक हैं और जल्दी निराश हो सकते हैं.

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