आत्मरक्षा के लिए अमेरिका से गुहार लगा रहा यूक्रेन, कभी खुद के न्यूक्लियर हथियारों पर इतराता था, फिर...

यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस ने उस पर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) से हमला किया है. हालांकि रूस ने इन आरोपों से इनकार किया है. यूक्रेन के पास एक समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार और 179  अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल थीं लेकिन आज उस पर परमाणु युद्द का खतरा मंडरा रहा है.

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1993 की इस तस्वीर में दिख रहा है कि कीव के पास एक एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल है (Photo by Georges DeKeerle/Sygma via Getty Images) 1993 की इस तस्वीर में दिख रहा है कि कीव के पास एक एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल है (Photo by Georges DeKeerle/Sygma via Getty Images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:16 AM IST

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को 1000 दिन पूरे हो चुके हैं और यह अब नाजुक दौर में पहुंच गया है. यूक्रेन ने बड़ा दावा करते हुए कहा है रूस ने यूक्रेनी शहर द्निप्रो पर गुरुवार को लंबी दूरी की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) से हमला किया है. यदि यूक्रेन का दावा सही निकलता है तो यह इतिहास में पहली बार होगा जब किसी देश ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाने वाली इस ICBM का इस्तेमाल किया है.

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हालांकि मास्को ने आरोपों से इनकार किया है. यह घटना तब हुई जब बाइडेन प्रशासन से इस्तेमाल की मंजूरी मिलने के बाद यूक्रेन ने रूस में छह अमेरिकी निर्मित लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं. रूस ने इसे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा खींची गई रेड लाइन को पार करना बताया है.दोनों देशों के बीच मौजूदा बढ़ते तनाव से परमाणु युद्ध का खतरा भी मंडरा गया है.

कभी विश्व में परमाणु हथियारों के मामले में तीसरे नंबर पर था यूक्रेन

जिस तरह आज परमाणु युद्ध को लेकर वैश्विक परिस्थितियां बन रही हैं, वैसा पहले कभी नहीं रहा.ऐसे समय में विश्व में जहां कई देशों ने परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश की है और कुछ देश गुप्त रूप से ऐसा करने का प्रयास कर रहे हैं, यूक्रेन एक अपवाद के रूप में सामने आता है. एक समय ऐसा था जब सोवियत संघ से विरासत में मिले यूक्रेन के पास रूस और अमेरिका के बाद परमाणु हथियारों का तीसरा सबसे बड़ा भंडार था.

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वाशिंगटन डीसी स्थित वैश्विक सुरक्षा संगठन, न्यूक्लियर थ्रेट इंस्टीट्यूट (एनटीआई) के अनुसार, "1991 में स्वतंत्रता के समय यूक्रेन के पास 1,900 सोवियत सामरिक परमाणु हथियार और 2,650-4,200 के बीच सोवियत सामरिक परमाणु हथियार थे." अब एक गैर-परमाणु हथियारों से संपन्न राष्ट्र यूक्रेन के पास  तब 170 से अधिक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) और थर्मोन्यूक्लियर वारहेड भी थे.

इन परमाणु हथियारों से लैस था यूक्रेन

यूक्रेन उन चार गणराज्यों में से एक था जहां सोवियत संघ ने रूस, बेलारूस और कजाकिस्तान के अलावा अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार किया था. एनटीआई के अनुसार, सिर्फ परमाणु हथियार ही नहीं, बल्कि उसके पास 176 आईसीबीएम मिसाइलें भी थीं जिनकी न्यूनतम मारक क्षमता 5,500 किमी तक थीं.

इसके अलावा इसमें 10 थर्मोन्यूक्लियर बम भी थे, जो हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों से कई गुना अधिक शक्तिशाली थे. आज यूक्रेन के पास कोई परमाणु हथियार नहीं है, और यूक्रेन के एक वर्ग को इस फैसले पर अफसोस है क्योंकि उसे रूस से आक्रमण का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल यूक्रेन रूस से लड़ने के लिए अपनी सैन्य जरूरतों के लिए अमेरिका पर बहुत अधिक निर्भर है.

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हार्वर्ड विश्वविद्यालय में यूक्रेन विशेषज्ञ मारियाना बुडजेरिन ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, "तथ्य यह है कि हमारे पास हथियार थे, हमने उन्हें सौंप दिया और अब देखिए क्या हो रहा है.' तो फिर वह क्या बात थी जिसने यूक्रेन को अपना समस्त सोवियत परमाणु भंडार रूस को सौंपने के लिए बाध्य किया?

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हमेशा रूस के पास रहा न्यूक्लियर ब्रीफ़केस

एक तथ्य जिसे समझना ज़रूरी है वह यह है कि सोवियत भंडार का संचालन नियंत्रण हमेशा रूस के पास रहा था. यह मॉस्को ही था जिसके पास 'न्यूक्लियर ब्रीफ़केस' था, जिसका मतलब है हमले शुरू करने के लिए डिवाइस की ऑथिरिटी, ट्रांसमिशन और कोड का उपकरण. हालांकि, यूक्रेनी वैज्ञानिक सोवियत परमाणु कार्यक्रम पर काम कर रहे थे और यूक्रेन के पास भंडार के संचालन और रखरखाव की साइंटिफिक नॉलेज थी.

1990 के दशक की शुरूआत में यूक्रेन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में जाना-पहचाना नाम नहीं था और उसे स्वतंत्र राष्ट्र बनने के लिए मान्यता प्राप्त करने हेतु प्रतिष्ठा और पहचान बनाने की जरूरत थी. उसने 5,000 से अधिक परमाणु हथियारों के भंडार को सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल किया. हार्वर्ड की मारियाना बुडजेरिन ने एनपीआर को एक अलग साक्षात्कार में बताया, "इन हथियारों को अपने पास रखने से यूक्रेन को आर्थिक रूप से और अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक नतीजों के रूप में काफी नुकसान उठाना पड़ता. इसलिए यह कोई आसान निर्णय नहीं था."

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1986 में यूक्रेनी शहर चेर्नोबिल में हुई परमाणु आपदा ने भी परमाणु शब्द को लोगों के लिए अभिशाप बना दिया. 1993 से 1998 तक यूक्रेन में अमेरिका के राजदूत रहे विलियम मिलर के अनुसार, उत्तरी यूक्रेन में 1986 में हुई चेर्नोबिल आपदा के कारण ही राष्ट्र को "परमाणु हथियारों को खत्म करने की आवश्यकता महसूस हुई." 

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बुडापेस्ट मेमोरेंडम

पूर्व परमाणु-बेस कमांडर और यूक्रेनी संसद सदस्य वोलोडिमिर टोलुबको सहित कई शीर्ष अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन को कभी भी न्यूक्लियर लीड को नहीं छोड़ना चाहिए. यूक्रेन ने 1991 में स्वतंत्रता की घोषणा की और 1994 में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर किए, जो 1968 में परमाणु हथियारों के खिलाफ प्रमुख समझौता था. उस समझौते ने यूक्रेन की संप्रभुता की सुरक्षा की गारंटी दी, और इसे बुडापेस्ट मेमोरेंडम  के रूप में जाना जाता है. रूसी आक्रमण के बीच इस पर गरमागरम बहस हो रही है. 2 जून 1996 को जब अंतिम परमाणु हथियार रूस में पहुंचा तो यूक्रेन ने अपना परमाणु टैग खो दिया.

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