अमेरिकी खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड का इस्तीफा, खुद बताई वजह

अमेरिका के खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने का फैसला किया है. इसे लेकर उन्होंने शुक्रवार को अपना इस्तीफा सौंपा. इसमें उन्होंने खुद इसके पीछे की वजह बताई है. उनका इस्तीफा 30 जून 2026 से प्रभावी होगा.

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गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के दौरान अपने इस्तीफे की जानकारी दी. (File Image: Reuters) गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के दौरान अपने इस्तीफे की जानकारी दी. (File Image: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST

अमेरिका के खुफिया विभाग की निदेशक तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने का फैसला किया है. उन्होंने यह निर्णय अपने पति अब्राहम विलियम्स की गंभीर बीमारी के चलते लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब्राहम को बोन कैंसर की एक बेहद दुर्लभ प्रकार की बीमारी का पता चला है, जिसके बाद गबार्ड ने सार्वजनिक जीवन से फिलहाल दूरी बनाने का फैसला किया है.

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फॉक्स न्यूज की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, तुलसी गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के दौरान अपने इस्तीफे की जानकारी दी. बताया जा रहा है कि 30 जून 2026 उनका आखिरी कार्य दिवस होगा.

फॉक्स न्यूज को मिले उनके औपचारिक इस्तीफा पत्र में गबार्ड ने लिखा, 'मैं आपके द्वारा मुझ पर जताए गए भरोसे और पिछले डेढ़ साल तक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय का नेतृत्व करने का अवसर देने के लिए बेहद आभारी हूं. लेकिन दुर्भाग्यवश मुझे 30 जून 2026 से अपना इस्तीफा देना पड़ रहा है.'

उन्होंने आगे लिखा कि उनके पति अब्राहम को हाल ही में हड्डियों के कैंसर के एक बेहद दुर्लभ रूप का पता चला है और आने वाले समय में उन्हें गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. गबार्ड ने कहा, 'इस समय मुझे सार्वजनिक सेवा से हटकर उनके साथ रहना और इस कठिन लड़ाई में उनका पूरा साथ देना जरूरी लगता है.'

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तुलसी गबार्ड ने अपने पत्र में पति के प्रति भावुक संदेश भी लिखा. उन्होंने कहा, 'अब्राहम पिछले 11 वर्षों की शादी में हमेशा मेरे मजबूत सहारे रहे हैं. पूर्वी अफ्रीका में संयुक्त विशेष अभियान मिशन के दौरान मेरी तैनाती, कई राजनीतिक अभियानों और अब इस पद पर सेवा के दौरान उन्होंने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया.'

उन्होंने कहा कि उनके पति का प्यार और समर्थन हमेशा उन्हें ताकत देता रहा है और वह ऐसे समय में उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकतीं. गबार्ड ने लिखा, 'मैं अच्छे विवेक के साथ उनसे यह उम्मीद नहीं कर सकती कि वे इस लड़ाई का अकेले सामना करें, जबकि मैं इस बेहद जिम्मेदारी वाले पद पर बनी रहूं.'

अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए तुलसी गबार्ड ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी खुफिया तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए. उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में खुफिया एजेंसियों के खर्च में कटौती कर अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लिए सालाना 70 करोड़ डॉलर से अधिक की बचत की गई. इसके अलावा उन्होंने इंटेलिजेंस कम्युनिटी में चल रहे DEI (Diversity, Equity and Inclusion) कार्यक्रमों को समाप्त करने की दिशा में भी कार्रवाई की.

गबार्ड ने अपने कार्यकाल के दौरान ट्रंप-रूस जांच, जॉन एफ. कैनेडी और रॉबर्ट एफ. कैनेडी हत्याकांड से जुड़े पांच लाख से अधिक सरकारी दस्तावेजों को डीक्लासिफाई किया. उन्होंने क्रॉसफायर हरिकेन जांच से जुड़े दस्तावेज भी सार्वजनिक किए, जिनके जरिए उन्होंने आरोप लगाया कि ओबामा प्रशासन के अधिकारियों ने 2016 चुनाव में रूसी हस्तक्षेप से जुड़ी खुफिया सूचनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर ट्रंप की पहली जीत को कमजोर करने की कोशिश की थी.

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इसके अलावा तुलसी गबार्ड ने वेपनाइजेशन वर्किंग ग्रुप का गठन नामक एक विशेष समूह भी बनाया था, जिसका उद्देश्य बाइडेन प्रशासन पर सरकारी एजेंसियों के कथित दुरुपयोग की जांच करना था. उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (NCTC) ने 2025 में नार्को-टेररिज्म से जुड़े 10 हजार से अधिक लोगों को अमेरिका में प्रवेश करने से रोका और 85 हजार से ज्यादा संदिग्धों को आतंक निगरानी सूची में डाला.

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