ईरान युद्ध पर ट्रंप ने खुद को दिए 10 में 15 नंबर, बोले- हम मजबूत स्थिति में

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी सेना बढ़त बना रही है और तेहरान का नेतृत्व तथा मिसाइल क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है

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अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया (Photo:Reuters) अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया (Photo:Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:47 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ जारी युद्ध में अमेरिकी सेना के प्रदर्शन की खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के एक हफ्ते से भी कम समय में अभियान ने तेज प्रगति हासिल की है और अमेरिका अब मजबूत स्थिति में है. 

व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुखों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी इस संघर्ष में बढ़त बना रहे हैं. उन्होंने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को बेहद सफल बताते हुए कहा कि युद्ध के मोर्चे पर स्थिति उम्मीद से बेहतर है. ट्रंप ने कहा, 'हम युद्ध के मोर्चे पर अच्छा कर रहे हैं. किसी ने मुझसे पूछा कि 10 में से आप इसे कितनी रेटिंग देंगे. मैंने कहा लगभग 15.'

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राष्ट्रपति का यह बयान उस समय आया जब मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेजी से बढ़ रहा है. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मौजूदा सैन्य अभियान के दौरान ईरान के नेतृत्व पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है. उनके मुताबिक, ईरानी नेतृत्व के कई अहम चेहरे इस अभियान में निशाने पर हैं.उन्होंने कहा कि अब अमेरिका मजबूत स्थिति में है और ईरान के नेतृत्व पर लगातार असर पड़ रहा है. 

जंग का छठा  दिन

 मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब छठा दिन में पहुंच चुका है. इस दौरान मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में नए धमाकों और सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं. अमेरिकी सेना इज़रायल के साथ मिलकर समन्वित सैन्य अभियान चला रही है. संघर्ष के दौरान समुद्री मोर्चे पर भी बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. 

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रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया. इसे इस युद्ध में नौसैनिक टकराव की बड़ी घटना माना जा रहा है. पेंटागन ने कहा है कि इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना और उसके सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाना है. मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते हालात के बीच यह संघर्ष अब क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है
 

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