'BNP की जीत पर नहीं, जमात की हार पर खुश हूं...', बांग्लादेश चुनाव नतीजों पर बोलीं तसलीमा नसरीन

बांग्लादेश चुनाव नतीजों पर मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए जमात की हार पर खुशी जताई है. लेखिका ने संविधान में धर्मनिरपेक्षता बहाल करने की सलाह दी है. साथ ही चिन्मय कृष्णा दास की रिहाई की भी मांग की है.

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तसलीमा नसरीन ने BNP सरकार के लिए दिए 15 सुझाव (Photo: PTI) तसलीमा नसरीन ने BNP सरकार के लिए दिए 15 सुझाव (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:07 PM IST

बांग्लादेश चुनाव के नतीजे आ गए हैं. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ज़ोरदार हासिल की है. BNP ने कुल 211 सीटों पर जीत हासिल की. दूसरे स्थान पर जमात-ए-इस्लामी पार्टी रही. चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद BNP को दुनियाभर से बधाईयां और सलाह मिल रही हैं. 

BNP की जीत पर प्रख्यात लेखिका तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि वह BNP की जीत पर ख़ुश नहीं हैं, बल्कि जमात-ए-इस्लामी जैसी इस्लामवादी पार्टी सत्ता में नहीं आ सकी. 

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तसलीमा नसरीन ने BNP को 15 सुझाव दिए हैं. जिसमें हिंदू साधु चिन्मय कृष्णा दास की रिहाई की भी मांग की है. साथ ही नसरीन ने संविधान में धर्मनिरपेक्षता बहाल करने की सलाह दी है.

अपने लंबे पोस्ट में तसलीमा नसरीन ने बीते डेढ़ साल के दौरान हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इस्लामवादी समूहों ने बड़े पैमाने पर रैलियां कीं, हिंसा फैलाई और खासकर अल्पसंख्यकों और महिलाओं को निशाना बनाया. उन्होंने बताया कि महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए गए और कई महिलाओं को चुनाव में भाग लेने से रोका गया.

यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में जीत के बाद पीएम मोदी और भारत को लेकर पहली बार क्या बोली BNP

नसरीन के सुझाव में संविधान में राज्य धर्म को हटाने की मांग प्रमुख है. इसके अलावा उन्होंने धर्म आधारित पारिवारिक कानूनों को समाप्त कर समान नागरिक संहिता लागू करने की भी सिफारिश की.

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लेखिका ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों की सुरक्षा, और हिंदू, बौद्ध, ईसाई और आदिवासी समुदायों की रक्षा पर ख़ास जोर दिया. उन्होंने मदरसा शिक्षा को समाप्त कर विज्ञान आधारित और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने की भी बात कही.

तसलीमा नसरीन ने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने और उसके नेताओं को राजनीतिक भागीदारी की अनुमति देने का सुझाव दिया. साथ ही उन्होंने भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने और कुछ ख़ास कैदियों की रिहाई की भी मांग की.

अंत में उन्होंने अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा पर जोर दिया और जिन किताबों, नाटकों तथा फिल्मों पर प्रतिबंध है, उन्हें हटाने की अपील की.

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