दुनिया में क्रूड ऑयल सप्लाई का अहम रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बुधवार को तीन हमले हुए हैं. इस हमले में एक कार्गो शिप में आग लग गई है और ये शिप इस संकरे रास्ते पर धधक रहा है. यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज में जहाजों और कार्गो शिप को निशाना बनाने की तीन घटनाएं हुई है. जहां अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया है. इसमें से एक जहाज भारत का गुजरात रहा था.
एपी की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट में एक कार्गो शिप से एक प्रोजेक्टाइल टकराया जिससे शिप में आग लग गई. देखते ही देखते ये शिप धधक उठा होर्मुज स्ट्रेट में समंदर की चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर रह जाती है, लेकिन इसका ऑपरेशनल हिस्सा मात्र 11 किलोमीटर है जहां से जहाज आ जा सकते हैं. समंदर के बाकी हिस्सों की गहराई कम है, और वहां से बड़े जहाज नहीं गुजर पाते हैं.
इसलिए इस संकरे जगह को काफी खतरनाक माना गया है. ताजा हमले की वजह से तेल संकट और भी बढ़ने की आशंका है. पिछले 72 घंटे में इस रूट से दूसरे देशों के मात्र 2 टैंकर ही गुजर सके हैं.
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार 11 मार्च को तीन शिप पर हमला किया गया है.
पहला अटैक- कार्गो शिप
पहले अटैक की जानकारी देते हुए यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने कहा कि ऐसा तब हुआ जब अमेरिका ने ईरानी माइन बिछाने वाले शिप को निशाना बनाया. ये समुद्री माइंस फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने को निशाना बना सकते थे.
ब्रिटिश मिलिट्री के चलाए जाने वाले यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने कहा कि हॉर्मुज स्ट्रेट में ओमान के ठीक उत्तर में शिप पर हमला हुआ था.
इस शिप से क्रू के सदस्यों को निकाल लिया गया, लेकिन कार्गो समंदर में धधक रहा है.
ईरान ने तुरंत हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली, हालांकि वह स्ट्रेट में और उसके आस-पास के जहाज़ों को निशाना बना रहा है, जिससे एक ऐसा वॉटरवे बाधित हो गया है जिससे तेल और नैचुरल गैस के कुल कारोबार का पांचवां हिस्सा गुजरता है.
गुजरात जा रहा था जहाज
बाद में ईरान ने पुष्टि की है कि उसने थाईलैंड के मालिकाना हक वाले इस जहाज पर हमला किया है. ये जहाज गुजरात जा रहा था. रॉयल थाई नेवी और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने बताया कि 11 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट में एक कार्गो वेसल को एक अनजान प्रोजेक्टाइल ने टक्कर मार दी थी. दो मैरीटाइम सिक्योरिटी सोर्स ने बताया कि थाईलैंड के झंडे वाले बल्क कैरियर मयूरी को ओमान से लगभग 11 नॉटिकल मील उत्तर में निशाना बनाया गया और उसे नुकसान पहुंचाया गया. हमले के बाद इस कार्गो शिप में आग लग गई थी.
दूसरा हमला- कंटेनर शिप
11 मार्च 2026 को सुबह लगभग 7:28 बजे भारतीय समय के हिसाब से स्ट्रेट ऑफ होरमुज के पास एक कंटेनर जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ.
यह घटना रास अल खैमा से ठीक 25 नॉटिकल मील यानी करीब 46 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में हुई. यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने बताया कि जहाज के कप्तान ने रिपोर्ट दी कि जहाज को नुकसान पहुंचा है लेकिन नुकसान की पूरी जानकारी अभी जांच में है. सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जहाज में आग लगने की बात कही गई है जबकि आधिकारिक यूकेएमटीओ रिपोर्ट में सिर्फ डैमेज का जिक्र है. इससे पर्यावरण से जुड़ा कोई असर नहीं हुआ है. लेकिन इस क्षेत्र में नेविगेशन बहुत खतरनाक हो गया है.
तीसरा हमला- कार्गो शिप
11 मार्च 2026 को सुबह यूके एमटीओ ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि दुबई से करीब 50 नॉटिकल मील यानी लगभग 93 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में एक बल्क कैरियर यानी कार्गो जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ. इससे जहाज को नुकसान पहुंचा है. हालांकि पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. सभी क्रू सदस्य सुरक्षित और स्वस्थ हैं. इस घटना की जांच चल रही है और क्षेत्र में जहाजों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
72 घंटे में 2 ऑयल टैंकर ही प्रवेश कर सके
AFP ने सूत्रों के हवाले से बताया कि 8 मार्च से अब तक यानी कि 72 घंटे मे 7 तेल टैंकर ही होर्मुज स्ट्रेट क्रॉस कर सके हैं. जिनमें ईरानी कार्गो से जुड़े 5 जहाज शामिल हैं. यानी कि इंटरनेशनल मार्केट के लिए मात्र 2 टैंकर ही हॉर्मुज क्रॉस कर सके हैं.
तेल का संकट और बढ़ने की आशंका
तीन कार्गो जहाजों पर प्रोजेक्टाइल हमले के बाद बीमा कंपनियों ने युद्ध जोखिम कवरेज रोक दिया है जिससे बड़े शिपिंग कंपनियां जैसे मर्स्क और सीएमए सीजीएम ने पूरी तरह ऑपरेशन सस्पेंड कर दिए हैं. पहले फरवरी के अंत में रोजाना सैंतीस टैंकर गुजरते थे लेकिन अब ट्रैफिक शून्य के करीब पहुंच गया है और डेढ़ सौ से ज्यादा जहाज बाहर लंगर डाले खड़े हैं.
इससे सऊदी अरब यूएई इराक और कुवैत जैसे देशों का तेल निर्यात रुक गया है जिससे वैश्विक बाजार में रोजाना बीस प्रतिशत तेल की कमी पैदा हो रही है. तेल की कीमतें पहले ही सौ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुकी हैं और अगर यह स्थिति हफ्तों तक चली तो एशिया यूरोप और भारत जैसे आयातक देशों में भारी कमी पड़ेगी क्योंकि वैकल्पिक रास्ता अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से जाना पड़ रहा है जो यात्रा को कई हफ्ते लंबा कर देता है और लागत बढ़ा देता है.
साथ ही एलएनजी सप्लाई भी प्रभावित होने से गैस की कीमतें दोगुनी हो गई हैं जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
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