भारत पर बाइडेन लगाएंगे प्रतिबंध? अमेरिका में विदेश मंत्री जयशंकर ने कही दो टूक

रूस से भारत ने एस-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद की है जिस पर अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार लटक रही है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिका का कानून है, वो चाहे जो करे लेकिन भारत किसी तरह के प्रतिबंध की परवाह नहीं करता है, उसे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की परवाह है.

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एस जयशंकर ने रूस से रक्षा खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर जवाब दिया है (Photo- PTI) एस जयशंकर ने रूस से रक्षा खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर जवाब दिया है (Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 12:26 PM IST
  • रूस से रक्षा खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर बोले जयशंकर
  • अमेरिका CAATSA के तहत लगा सकता है भारत पर प्रतिंबध
  • जयशंकर बोले- भारत को प्रतिबंधों की परवाह नहीं

रूस पर भारत के रुख को लेकर कई मुद्दों पर बढ़ते अमेरिकी दबाव के बीच भी भारत पीछे हटता नजर नहीं आ रहा है. रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद को लेकर भारत पर लगातार अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा मंडरा रहा है. लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि वो किसी तरह के प्रतिबंध की परवाह किए बिना अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसे लेकर एक बड़ा बयान दिया है.

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एस जयशंकर ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि अगर रूस से मिसाइल सिस्टम की खरीद को लेकर अमेरिका भारत पर CAATSA कानून के तहत प्रतिबंध लगाना चाहता है तो लगा सकता है, भारत को अपनी सुरक्षा की परवाह है. CAATSA अमेरिका का एक कानून है जिसके तहत वो रूस से अहम रक्षा सौदे करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाता है. भारत ने जब रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम का सौदा किया तब अमेरिका की तरफ से ये संकेत दिए गए थे कि अमेरिका भारत पर इस कानून का इस्तेमाल कर सकता है लेकिन अमेरिका ने उस वक्त कोई प्रतिबंध नहीं लगाया. 

यूक्रेन पर रूसी हमला और भारत का अमेरिकी पाले में न जाना- इन बातों को लेकर ऐसा कहा जाने लगा है कि अब अमेरिका भारत पर CAATSA के तहत प्रतिबंध लगा सकता है. इसी चर्चा को लेकर विदेश मंत्री ने कहा, 'ये उनका कानून है और उन्हें जो करना है, वो करेंगे ही. जयशंकर ने इस बयान से स्पष्ट कर दिया कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाएगा.

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रूस से तेल खरीद पर भी बोले जयशंकर

एस जयशंकर फिलहाल भारत-अमेरिका टू-प्लस-टू वार्ता को लेकर अमेरिका में मौजूद हैं. अमेरिका में कई मुद्दों पर दिए गए उनके बयान काफी चर्चा में हैं. रूस से भारत की तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव का भी उन्होंने करारा जवाब दिया है. दरअसल, भारत रूस पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के प्रतिबंधों के बावजूद भी उससे तेल खरीद रहा है जिसे लेकर अमेरिका लगातार भारत पर तेल न खरीदने का दबाव बना रहा है. 

इसे लेकर एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री ऑस्टिन लॉयड के साथ सोमवार को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत की तरफ उंगली उठाने से पहले यूरोप की तरफ ध्यान दिया जाए.

उन्होंने कहा, 'अगर आपको रूस से भारत की ऊर्जा खरीद की चिंता है तो मेरा सुझाव है कि  आपको यूरोप पर ध्यान देना चाहिए. हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए थोड़ी मात्रा में रूस से ऊर्जा आयात करते हैं. लेकिन आप आंकड़ें देखिए, हम जितना तेल रूस से एक महीने में नहीं खरीदते, उससे कहीं अधिक तेल यूरोप रूस से एक दिन में खरीदता है.'

भारत के मानवाधिकार पर अमेरिका ने उठाया सवाल तो जयशंकर ने किया पलटवार
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एंटनी ब्लिंकन ने भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत में मानवाधिकार उल्लंघन पर कड़ी नजर बनाए है. उन्होंने कहा था, 'हम अपने मानवाधिकार के साझे मूल्यों पर लगातार भारत के संपर्क में रहते हैं. भारत में कुछ सरकारों, पुलिस और जेल अधिकारियों की तरफ से मानवाधिकार हनन के मामलों पर हमारी नजर है.'

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अमेरिकी विदेश मंत्री की इस टिप्पणी पर अब एस जयशंकर ने भी जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि 2+2 वार्ता में मानवाधिकार मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई लेकिन अगर इस मुद्दे पर कभी चर्चा होती है तो भारत अपनी राय रखने में पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने कहा कि लोग भारत के बारे में अपनी राय रखने को स्वतंत्र हैं. उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत भी अमेरिका में मानवाधिकारों के स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

जयशंकर ने कहा, 'लोगों को अधिकार है कि वो हमारे बारे में एक विचार रखें. लेकिन उसी तरह हमें भी उनके बारे में अपना नजरिया रखने का अधिकार है. हमें उन हितों के अलावा लॉबियों और वोट बैंक पर बोलने का अधिकार है, जो इस तरह की बातों को हवा देते हैं. हम इस मामले में शांत नहीं बैठेंगे. दूसरों के मानवाधिकारों को लेकर भी हमारी राय है.' 

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