भारत के बाद अब बांग्लादेश भी रोहिंग्या मुस्लिम से सतर्क, सता रहा पाक के ISI कनेक्शन का डर

बांग्लादेश सरकार में सूत्रों की मानें, सरकार को डर है कि ISI अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) का इस्तेमाल कर सकती है. ISI इन ग्रुपों के जरिए देश में एंटी नेशनल गतिविधियां शुरू करवा सकती है

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बांग्लादेश में भी रोहिंग्या को लेकर सतर्कता बांग्लादेश में भी रोहिंग्या को लेकर सतर्कता

मोहित ग्रोवर

  • बांग्लादेश,
  • 15 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 12:34 PM IST

म्यांमार में हो रही हिंसा के कारण रोहिंग्या मुसलमान लगातार बांग्लादेश की ओर पलायन कर रहे हैं. अभी तक के आंकड़ों के मुताबिक, 389,000 रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं. लेकिन अब बांग्लादेश को भी अपने देश की सुरक्षा सताने लगी है. बांग्लादेश को डर है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI रोहिंग्या मुस्लिमों की मदद से उनके देश में मुश्किलें बढ़ा सकती है.  

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बांग्लादेश सरकार में सूत्रों की मानें, सरकार को डर है कि ISI (ARSA) का इस्तेमाल कर सकती है. ISI इन ग्रुपों के जरिए देश में एंटी नेशनल गतिविधियां शुरू करवा सकती है और आने वाले चुनावों में बांग्लादेश नेशनल पार्टी की मदद कर सकती है.

सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना कुछ समय पहले भारत दौरे पर थीं, जहां उन्होंने भारत के साथ भी इस मुद्दे पर बात की थी.

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने की ओर से कहा जा रहा है कि "रोहिंग्या मुसलमान देश की सुरक्षा के लिए खतरा है और इस समुदाय के लोग आतंकी संगठनों से भी जुड़े हो सकते हैं". हालांकि, कोर्ट से सरकार ने इसे होल्ड करने की अपील की है. वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार 18 तारीख को हलफनामा दायर करेगी.

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म्यांमार में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर सयुंक्त राष्ट्र ने कहा है कि राखिन इलाके में रह रहे करीब 40 फीसदी लोग बांग्लादेश जा चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कि 25 अगस्त से लेकर अब तक म्यामांर सीमा पार करके बांग्लादेश जाने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या 389,000 पर पहुंच गई है.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 24 घंटे में 10,000 लोगों के बांग्लादेश जाने की खबर है. गत वर्ष अक्टूबर में राखिन प्रांत में हिंसा के दौरान वहां से भागने वाले लोगों की संख्या मिलाकर इस प्रांत में रहने वाले रोहिंग्या आबादी के करीब 40 फीसदी लोग अब तक बांग्लादेश जा चुके हैं.’’

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