पाकिस्तान: पूर्व पत्नी पर शख्स ने लगाया झूठा आरोप... अदालत ने सुनाई 80 कोड़े मारने की सजा

कराची की एक अदालत ने पत्नी पर चरित्रहीन होने का झूठा आरोप लगाने और बच्ची को न अपनाने वाले शख्स को 80 कोड़े मारने की अजीबोगरीब सजा सुनाई है.

Advertisement
पाकिस्तान की कोर्ट ने सुनाई दुर्लभ सजा. (सांकेतिक फोटो) पाकिस्तान की कोर्ट ने सुनाई दुर्लभ सजा. (सांकेतिक फोटो)

aajtak.in

  • कराची,
  • 09 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

पाकिस्तान के कराची में अदालत ने एक शख्स को दुर्लभ सजा सुनाई है. कोर्ट ने सिंधू प्रांत के एक व्यक्ति को अपनी पूर्व पत्नी पर चरित्रहीन होने का झूठा आरोप लगाते हुए बच्चे को न अपनाने के मामले में 80 कोड़े मारने का आदेश दिया है.

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मालिर शेहनाज बोह्यो ने फरीद कादिर को अपने कानूनी बच्चे को न अपनाने और अपनी पूर्व पत्नी के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए 80 कोड़े मारे जाने की सजा सुनाई. अदालत ने आरोपी को सोमवार को कजफ अध्यादेश, 1979 के अपराध की धारा 7 (1) के तहत दोषी ठहराया था. इस अध्यादेश की धारा में लिखा है कि जो कोई भी हदद के लिए उत्तरदायी कजफ करेगा, उसे अस्सी कोड़े मारने की सजा दी जाएगी.

Advertisement

अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ये बिल्कुल स्पष्ट है कि आरोपी झूठा है और उसने शिकायतकर्ता पर उसकी बेटी की नाजायज के संबंध में कजफ का आरोप लगाया था. इसके लिए फरीद को दोषी ठहराया जाता है. अदालत ने अपने फैसले में ये भी कहा कि दोष सिद्धि के बाद फरीद कादिर द्वारा दी गए सबूत किसी भी अदालत में मान्य नहीं होंगे.

जमा करना होगा एक लाख का जमानती बांड

अदालत ने फैसले में यह भी कहा कि दोषी को केवल कोड़े मारने दी गई है. इसलिए वह जमानत पर रहेगा. बशर्ते कि वह दोषी ठहराए जाने और सजा की पुष्टि के बाद कोड़े की सजा के लिए इस अदालत द्वारा तय किए वक्त और जगह पर उसे मौजूदगी के लिए सहमत रहना होगा. इसके लिए फरीद को एक लाख रुपये का जमानती बांड जमा करें.

Advertisement

दोष की पूर्व पत्नी (जिसकी शादी फरवरी 2015 में हुई थी) ने कहा कि वे एक महीने तक खुशी-खुशी उसके साथ रहा और दिसंबर, 2015 में उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया. हालांकि, महिला का पूर्व पति उसका भरण-पोषण करने या उसे अपने घर वापस ले जाने में विफल रहा.

'मैं सिर्फ पत्नी के साथ छह घंटे रहा'

वहीं, जब पीड़िता पारिवारिक अदालत में गई तो न्यायाधीश ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया और दोषी को अपनी बेटी, पूर्व पत्नी के लिए भरण-पोषण देने का निर्देश दिया. हालांकि, फरीद ने निष्पादन आवेदन की कार्यवाही के दौरान अदालत में दो आवेदन किए. जिसमें बच्ची के लिए डीएनए परीक्षण और अपनी बेटी को अस्वीकार करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपने आवेदन वापस ले लिए.

मुकदमे के दौरान, आरोपी ने अपनी पूर्व पत्नी के संबंध में आरोपों से इनकार किया और कहा कि वह शादी के बाद केवल छह घंटे तक उसके साथ रही और फिर उसने घर छोड़ दिया. 

कई दशकों बाद सुनाई गई है ऐसी सजा

वहीं, अभियोजक सायरा बानो ने कहा कि वकील ने कहा, मैंने एक वकील के रूप में अपने पिछले 14 साल के करियर के दौरान मैंने कफ्ज अध्यादेश की धारा 7 के तहत कोड़े मारने की कोई सजा नहीं देखी. कोड़े मारने की ये सजा दशकों में शारीरिक दंड के रूप में पहली घटना हो सकती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement