मध्य-पूर्व में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग से पैदा हुए ऊर्जा संकट का अब एक और असर सामने आया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने 23 मार्च को होने वाली पाकिस्तान डे (गणतंत्र दिवस) परेड और उससे जुड़े सभी समारोह रद्द करने का ऐलान किया है.
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय ने कहा, 'खाड़ी क्षेत्र में जारी तेल संकट और सरकार की ओर से घोषित कम खर्च के उपायों को देखते हुए 23 मार्च को होने वाली परेड और सभी संबंधित कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे.'
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई बाधित होने के कारण पाकिस्तान गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. इसे देखते हुए पाकिस्तान की सरकार खर्च कम करने से जुड़े कदम उठा रही है.
पाकिस्तान के लिए ऐतिहासिक दिन है 23 मार्च
23 मार्च पाकिस्तान के लिए ऐतिहासिक दिन है. इसी दिन 1940 में लाहौर प्रस्ताव पेश किया गया था. इस प्रस्ताव में अलग मुस्लिम देश की मांग की गई थी, जो आगे चलकर 1947 में भारत के विभाजन का कारण बना. बाद में 23 मार्च 1956 को पाकिस्तान ने अपना पहला संविधान अपनाकर खुद को गणतंत्र घोषित किया.
ऊर्जा संकट की वजह से पाकिस्तान पहले ही सतर्क हो चुका है. युद्ध शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद सरकार ने वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज जैसे कदम उठाए, ताकि सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम हो सके और ईंधन की बचत हो.
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है. पाकिस्तान अपनी 85 से 99 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी की जरूरत इसी रास्ते से पूरी करता है. पाकिस्तान में तेल-गैस ज्यादातर कतर और यूएई से आता है. एक हफ्ते से ज्यादा समय तक सप्लाई बाधित रहने से तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान का मासिक ईंधन आयात बिल 1.7 अरब डॉलर से बढ़कर 3.5 से 4.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. एलएनजी की कमी के चलते पाकिस्तान ईंधन के वैकल्पिक स्रोत ढूंढ रहा है और बिजली की कटौती जैसे कदम भी उठाने पड़ रहे हैं.
इस संकट का असर महंगाई पर भी पड़ा है और खाड़ी देशों में काम कर रहे करीब 47 लाख पाकिस्तानियों से आने वाली रेमिटेंस पर भी खतरा मंडरा रहा है.
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इस बार 23 मार्च को 'सादगी और सम्मान' के साथ मनाया जाएगा, जिसमें सिर्फ झंडारोहण जैसे सीमित कार्यक्रम होंगे. आमतौर पर इस दिन इस्लामाबाद में 31 तोपों और प्रांत की राजधानियों में 21 तोपों की सलामी दी जाती है, जिसके बाद सेना की भव्य परेड होती है.
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