ईरान पर US के हमले के बाद परमाणु बम को लेकर कंफ्यूज किम जोंग! क्या ट्रंप से करेंगे बात

ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमलों के बाद वैश्विक परमाणु समीकरण बदलते दिख रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उत्तर कोरिया की रणनीति पर असर पड़ सकता है. किम जोंग उन के सामने दुविधा है, क्या वह अमेरिका से बिना शर्त बातचीत करें या पहले खुद को परमाणु राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाने पर जोर दें. चीन और रूस से नजदीकी भी उनके आत्मविश्वास का आधार मानी जा रही है.

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किम जोंग उन के सामने रणनीतिक दुविधा (Photo: ITG) किम जोंग उन के सामने रणनीतिक दुविधा (Photo: ITG)

aajtak.in

  • प्योंगयांग ,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:21 PM IST

अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. उनकी मौत के बाद वैश्विक स्तर पर परमाणु नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों का असर उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर भी पड़ेगा और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फिर से वार्ता की राह चुनते हैं.

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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सियोल में इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच प्योंगयांग अपनी रणनीति कैसे बदलेगा. यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कोरियन स्टडीज़ के चेयर प्रोफेसर यांग मू-जिन ने कहा कि किम जोंग उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव काफी हो सकता है. उनके अनुसार, बाहरी तौर पर वह खुद को परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के नेता के रूप में प्रस्तुत करेंगे, लेकिन व्यावहारिक रूप से सुरक्षा उपायों को और मजबूत करेंगे, चाहे वह शिखर वार्ता हो या सार्वजनिक कार्यक्रम.

ईरान पर हमलों के बाद बढ़ी परमाणु बम पर बहस

यांग मू-जिन ने यह भी कहा कि बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. यदि किम, ट्रंप के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल कर वॉशिंगटन का रुख समझने की कोशिश करें और साथ ही परमाणु क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए समय लें तो वार्ता की एक खिड़की खुल सकती है.

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हालांकि, उत्तर कोरिया के सामने एक रणनीतिक दुविधा ये है कि क्या वह अमेरिका की बिना शर्त वार्ता की पेशकश स्वीकार करे या पहले खुद को परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाने पर जोर दे. यांग के मुताबिक, यह द्वंद्व प्योंगयांग को कठिन स्थिति में डाल सकता है.

किम जोंग उन के सामने कूटनीतिक दुविधा

ईरान के विपरीत, उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु नीति को कानून और संविधान में शामिल कर रखा है और उसके पास उन्नत हथियार तकनीक भी है. यांग ने कहा, 'उस अर्थ में उसके पास परमाणु बटन है.'

विश्लेषकों का मानना है कि किम को यह भरोसा भी होगा कि चीन और रूस के साथ उसके संबंध उसे सुरक्षा प्रदान करते हैं. सितंबर में किम ने बख्तरबंद ट्रेन से बीजिंग की यात्रा की थी, जहां वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक सैन्य परेड में नजर आए थे.

क्या फिर करेंगे ट्रंप से बात ?

आसन इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज़ के शोधकर्ता यांग उक ने कहा कि उस एक टेलीविज़न तस्वीर ने उत्तर कोरिया को रूस और चीन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े परमाणु संपन्न सत्तावादी राष्ट्र का प्रतीकात्मक दर्जा दिला दिया.

उनके अनुसार, उत्तर कोरिया का मूल उद्देश्य सिर्फ एक है, अमेरिका से परमाणु राष्ट्र के रूप में मान्यता. यदि वार्ता होती भी है, तो वह परमाणु शक्तियों के बीच हथियार नियंत्रण वार्ता के रूप में होनी चाहिए.

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