राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मिजोरम में अवैध सीमा पार करने और कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोपों में छह यूक्रेनी नागरिकों समेत एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है. सातों आरोपियों को कोर्ट ने 11 दिन की NIA की हिरासत में भेज दिया. इस बीच अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर यूक्रेन ने विरोध जताया है और उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की है.
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत को आधिकारिक विरोध-पत्र सौंपा है. साथ ही अपने नागरिकों की तत्काल रिहाई और उन्हें कांसुलर पहुंच देने की मांग की है.
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय की प्रेस सर्विस के अनुसार, 13 मार्च 2026 को मिजोरम में छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया गया. आरोप है कि उन्होंने बिना विशेष परमिट के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और भारत-म्यांमार सीमा को अवैध रूप से पार किया. यूक्रेन का कहना है कि अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जो इन नागरिकों को भारत या म्यांमार में किसी अवैध गतिविधि से जोड़ता हो.
यूक्रेन के दूतावास ने बताया कि 16 मार्च को विशेष एनआईए अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें दूतावास के प्रतिनिधि मौजूद थे, लेकिन उन्हें गिरफ्तार व्यक्तियों से सीधे मिलने की अनुमति नहीं दी गई. अदालत ने हिरासत 27 मार्च तक बढ़ा दी. यूक्रेन ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखते हुए भारत ने गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना नहीं दी.
भारत में यूक्रेनी राजदूत ने सौंपा विरोध पत्र
भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेकसांद्र पोलिशचुक ने भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम देशों के) सिबी जॉर्ज से मुलाकात कर उन्हें विरोध-पत्र सौंपा. उन्होंने अपने नागरिकों की तुरंत रिहाई और उनसे मिलने की मांग की. यूक्रेन ने यह भी कहा कि मिजोरम जैसे क्षेत्रों में विदेशियों के लिए विशेष अनुमति जरूरी होती है और सीमा की अस्पष्टता के कारण अनजाने में गलती हो सकती है.
दूसरी ओर, NIA का दावा है कि ये सात आरोपी- मैथ्यू एरन वैनडाइक (अमेरिका), हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिंस्की विक्टर (सभी यूक्रेन) प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को हथियार, सैन्य उपकरण और ट्रेनिंग मुहैया करा रहे थे.
पूछताछ में पता चला कि वो अज्ञात आतंकियों के संपर्क में थे. NIA का आरोप है कि आरोपी जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े थे और यूरोप से ड्रोन की खेप म्यांमार पहुंचाकर भारत में उग्रवाद को बढ़ावा दे रहे थे. जांच में सातों विदेशों के खिलाफ यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं. NIA का कहना है कि आरोपी पर्यटक वीजा पर भारत आए, लेकिन मिजोरम के प्रतिबंधित इलाकों से होकर म्यांमार पहुंचे और वहां विद्रोही समूहों को ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग दी.
यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और पड़ोसी देशों में चल रहे संघर्षों से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील है.
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