कब पूरी होगी नेपाल के Gen-Z आंदोलन की जांच? तीसरी बार बढ़ी समयसीमा

नेपाल सरकार ने पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के दौरान हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की जांच कर रहे आयोग का कार्यकाल तीसरी बार 25 दिन बढ़ाकर 11 मार्च तक कर दिया है. तीन सदस्यीय इस आयोग का गठन सितंबर में अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सरकार ने किया था, जिसकी अगुवाई पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की कर रहे हैं.

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तीन सदस्यीय आयोग का नेतृत्व पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की कर रहे हैं और इसमें पुलिस व कानूनी विशेषज्ञ भी शामिल हैं. (Photo: Reuters) तीन सदस्यीय आयोग का नेतृत्व पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की कर रहे हैं और इसमें पुलिस व कानूनी विशेषज्ञ भी शामिल हैं. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • काठमांडू,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:57 AM IST

नेपाल सरकार ने सोमवार को पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए बनाए गए आयोग का कार्यकाल 25 दिन और बढ़ा दिया. यह तीसरी बार है जब जांच आयोग की समयसीमा बढ़ाई गई है. मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया और आयोग की नई समयसीमा 11 मार्च तक तय की गई है. 

11 फरवरी को खत्म होने वाला था कार्यकाल
 
आयोग के प्रवक्ता और सदस्य बिग्यान राज शर्मा ने बताया कि आयोग का कार्यकाल बुधवार, 11 फरवरी को खत्म होने वाला था. तीन सदस्यीय जांच आयोग का गठन पिछले साल सितंबर में अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सरकार ने किया था. आयोग की अगुवाई पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की कर रहे हैं. 

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इसका मकसद युवा-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की जांच करना है. आयोग में पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक (एआईजीपी) शर्मा और कानूनी विशेषज्ञ बिश्वेश्वर भंडारी सदस्य हैं.

पिछले साल हुए थे प्रदर्शन

8 और 9 सितंबर को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हुए Gen-Z आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की गठबंधन सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी. दो दिन चले इन प्रदर्शनों में कम से कम 77 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से 22 लोग पहले दिन ही मारे गए थे. 

तीसरी बार बढ़ी समयसीमा

आयोग का कार्यकाल तीसरी बार इसलिए बढ़ाया गया है क्योंकि रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत बताई गई है. आयोग ने Gen-Z आंदोलन के दमन से जुड़े मामले में ओली और तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक सहित करीब 170 लोगों के लिखित और रिकॉर्ड किए गए बयान लिए हैं.

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