NASA ने एक अप्रैल को अपने आर्टेमिस II मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया. ये 1972 के अपोलो युग के बाद पहला क्रूड लूनर मिशन है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर हाई-स्पीड यात्रा करके वापस पृथ्वी पर लौटेंगे. ये मिशन लगभग 10 दिनों तक चलेगा और भविष्य में चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की तैयारी करेगा.
आर्टेमिस II मिशन का मुख्य उद्देश्य ऑरियन स्पेसक्राफ्ट के सिस्टम्स को अंतरिक्ष में परीक्षण करना, हाई-एनर्जी री-एंट्री का टेस्ट करना और आर्टेमिस प्रोग्राम के अगले चरणों (जैसे Artemis III में चंद्रमा लैंडिंग) के लिए रास्ता तैयार करना है.
लॉन्चिंग डे
आर्टेमिस II ने फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी. लॉन्च के बाद ओरियन क्रू कैप्सूल रॉकेट के ऊपरी हिस्से से अलग होकर पृथ्वी की एक अंडाकार कक्षा में एंटर कर गया है.
दिन 1–2: पृथ्वी ऑर्बिट में जांच
पहले और दूसरे दिन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की ऊंची कक्षा में रहकर ओरियन के महत्वपूर्ण सिस्टम की जांच करेंगे, जिसमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम, प्रोपल्शन, नेविगेशन और ऑक्सीजन सप्लाई की टेस्टिंग शामिल है. ये परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं कि अंतरिक्ष यान गहरे अंतरिक्ष की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है. जांच के बाद ओरियन का इंजन 'ट्रांसलूनर इंजेक्शन' प्रक्रिया के जरिए ओरियन को पृथ्वी की कक्षा से बाहर चांद की ओर भेजा जाएगा.
दिन 3–4: चंद्रमा की ओर यात्रा
तीसरे और चौथे दिन अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर बढ़ते हुए पृथ्वी से अब तक की सबसे लंबी दूरी तय करेंगे. इस दौरान मिशन कंट्रोल संचार और नेविगेशन की जांच करता रहेगा.
चंद्रमा फ्लाई बाय
मिशन के बीच में ओरियन चंद्रमा के पीछे 'फ्री-रिटर्न' से गुजरेगा. ये एक प्राकृतिक रास्ता है जो यान को अपने आप धरती की दिशा में मोड़ देगा.
दिन 5–8: पृथ्वी की ओर वापसी
चंद्रमा के पास से गुजरने के बाद अंतरिक्ष यात्री कई दिनों तक पृथ्वी की ओर लौटेंगे. इस दौरान गहरे अंतरिक्ष में पावर सिस्टम, थर्मल कंट्रोल और क्रू ऑपरेशन से जुड़े परीक्षण जारी रहेंगे.
पृथ्वी पर वापसी
धरती के करीब पहुंचते ही ओरियन 25,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से वायुमंडल में प्रवेश करेगा. इस दौरान हीट शील्ड की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा. लास्ट में यान प्रशांत महासागर में उतरेगा, जहां रिकवरी टीम अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाएगी.
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