अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमले के बाद मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में मारे जा चुके हैं. अमेरिका-इजरायल के हमले का बदला लेने के लिए ईरान ने मिडिल ईस्ट के उन देशों पर मिसाइल अटैक किया जो अमेरिका के सहयोगी हैं या फिर अमेरिका का उन देशों में किसी भी प्रकार का सैन्य बेस है. ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच टकराव सिर्फ सीधी सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है.
इस संघर्ष का एक अहम पहलू वो सशस्त्र गुट (मिलिशिया) हैं, जो ईरान के समर्थन से या उसके साथ वैचारिक निकटता रखते हुए अलग-अलग मोर्चों से इज़रायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. गाजा, इराक, यमन और लेबनान इन चार क्षेत्रों से सक्रिय चार प्रमुख सशस्त्र गुट इस व्यापक टकराव में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
हमास
गाजा पट्टी में सक्रिय हमास इज़रायल के साथ लंबे समय से संघर्ष में रहा है. रॉकेट हमलों, सीमा पार घुसपैठ और सशस्त्र टकराव के जरिए यह गुट इज़रायल पर दबाव बनाता रहा है. ईरान पर इजरायल के हमले के बाद मौजूदा हालात में गाजा से दागे जा रहे रॉकेट और ड्रोन हमले क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा रहे हैं. हमास को ईरान से वित्तीय और सैन्य समर्थन मिलने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं.
इस्लामिक रेसिस्टेंस फोर्स
इराक में सक्रिय 'इस्लामिक रेसिस्टेंस' नाम से जुड़े कई सशसत्र गुट अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते रहे हैं. ड्रोन और रॉकेट हमलों के जरिए ये गुट अमेरिकी मौजूदगी का विरोध करते हैं. इन संगठनों को भी ईरान समर्थित नेटवर्क का हिस्सा माना जाता है, जो क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देने की रणनीति पर काम करता है.
हूति
यमन के हूति विद्रोही लाल सागर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों और इज़रायल से जुड़े लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण चर्चा में है. हूतियों ने कई बार इज़रायल के खिलाफ समर्थन की घोषणा की है और क्षेत्रीय संघर्ष को 'प्रतिरोध' की लड़ाई बताया है. इनकी गतिविधियों से वैश्विक समुद्री व्यापार भी प्रभावित हुआ है.
हिज़्बुल्लाह
लेबनान में सक्रिय हिज़्बुल्लाह को क्षेत्र का सबसे संगठित और सशक्त मिलिशिया गुट माना जाता है. उत्तरी इज़रायल सीमा पर रॉकेट हमलों और सैन्य झड़पों के जरिए यह गुट इज़रायल पर रणनीतिक दबाव बनाता है. हिज़्बुल्लाह और ईरान के बीच करीबी संबंधों की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होती रही है और ये भी इजरायल पर कई बार हमले कर चुका है.
इन चारों गुटों की गतिविधियां से इस जंग में कई मोर्चे खुल गए हैं. गाजा से लेकर लाल सागर और लेबनान सीमा तक फैला यह संघर्ष मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परोक्ष युद्ध (proxy conflict) और तेज होता है, तो इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.
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