अमेरिका में भारतीय मूल के एक जज केपी जॉर्ज को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी ठहराया गया है. यह फैसला टेक्सास के फोर्ट बेंड काउंटी की अदालत में सुनाया गया. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जूरी ने केपी जॉर्ज को मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामलों में दोषी पाया. यह मामला उनके चुनाव प्रचार के पैसों के गलत इस्तेमाल से जुड़ा है. एक हफ्ते तक चले ट्रायल के बाद यह फैसला आया.
केपी जॉर्ज पर तीसरे दर्जे के फेलोनी (गंभीर अपराध) के तहत केस चला था, जिसमें 2 से 10 साल तक की सजा हो सकती है. उन्होंने सजा की अवधि तय करने का फैसला जज पर छोड़ दिया है. सजा सुनाने की प्रक्रिया 16 जून से शुरू होगी. फैसले के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में 20,000 डॉलर के बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया. रिहाई की शर्त के तहत उन्हें अपना अमेरिकी पासपोर्ट जमा करना पड़ा है.
चुनावी फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप
अभियोजन पक्ष का कहना है कि जॉर्ज ने बार-बार अपने चुनावी फंड को लेकर गलत जानकारी दी और इस पैसे का निजी खर्चों में इस्तेमाल किया. उन पर आरोप है कि उन्होंने चुनावी फंड से पैसे अपने निजी खातों में ट्रांसफर किए और कार की किस्तों समेत अन्य निजी खर्चों में खर्च किए.
अभियोजकों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अलग-अलग राज्यों के खातों के जरिए पैसों का लेन-देन किया, जिसमें डेलावेयर और मैसाचुसेट्स से जुड़े अकाउंट शामिल थे.
वहीं, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को गलत बताया. उनके वकीलों ने कहा कि यह मामला अधूरी जानकारी और गलत मान्यताओं पर आधारित है. उनका कहना था कि जॉर्ज ने कोई गैरकानूनी पैसा इस्तेमाल नहीं किया और अभियोजन पक्ष धोखाधड़ी की मंशा साबित नहीं कर पाया.
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उम्मीदवार अपने चुनावी अभियान को खुद कर्ज दे सकते हैं और बाद में वह पैसा वापस ले सकते हैं. हालांकि, जूरी ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया और गंभीर आरोपों में केपी जॉर्ज को दोषी ठहराया.
कौन हैं KP जॉर्ज?
केपी जॉर्ज भारत के केरल से ताल्लुक रखते हैं. 2018 में वे फोर्ट बेंड काउंटी के पहले अश्वेत (पर्सन ऑफ कलर) जज बने थे. यह टेक्सास के तेजी से बढ़ते और विविधता वाले इलाकों में से एक है. बताया जाता है कि उनका जन्म भारत के एक छोटे से गांव में हुआ था, जहां बिजली तक नहीं थी. उनके पिता एक ट्रक ड्राइवर थे और उनका बचपन काफी गरीबी में बीता.
उन्होंने बचपन में मलयालम भाषा बोली और साधारण परिवार से आगे बढ़कर अमेरिका की राजनीति में पहचान बनाई. वे पहले डेमोक्रेट पार्टी से जुड़े थे, बाद में रिपब्लिकन पार्टी में चले गए. भारतीय-अमेरिकी समुदाय में उन्हें एक बड़ा चेहरा माना जाता रहा है.
आगे क्या होगा?
कानून के मुताबिक, दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद उनका पद नहीं जाएगा. सजा तय होने के बाद ही उन्हें पद से हटाया जा सकता है. अगर वे फैसले के खिलाफ अपील करते हैं, तो यह प्रक्रिया और लंबी हो सकती है. इसके अलावा, उनके खिलाफ एक और मामूली केस भी चल रहा है, जिसमें पहचान से जुड़ी गलत जानकारी देने का आरोप है. इस मामले की सुनवाई मई में शुरू होने की उम्मीद है.
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