अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान पर भीषण हमले किए जो तीसरे दिन भी जारी हैं. इसके जवाब में ईरान भी कई देशों में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में टकराव बढ़ता जा रहा है. अब इस युद्ध में यूरोप के तीन बड़े देशों- ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की एंट्री हो गई. इन तीनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वो इस युद्ध में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का साथ देने के लिए तैयार हैं. इसका सीधा-सा मतलब ये है कि अब इस युद्ध में ईरान के खिलाफ 15 देश एकजुट हो गए हैं और अब इस युद्ध को रोकना नामुमकिन होता जा रहा है.
दूसरी तरफ खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने भी अपने तेवर से बता दिया है कि वो रुकने वाला नहीं है. इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. मिडिल ईस्ट के देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें गैर-ज़रूरी मूवमेंट से बचने के लिए कहा गया है.
उधर, सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का सैन्य ऑपरेशन जारी है. इस आतंकी सरकार से अमेरिका को गंभीर खतरा बना हुआ था. ईरान परमाणु हथियारों की अपनी जिद पर अड़ा हुआ था. इस वजह से अमेरिका पूरी तरह से अलर्ट था. उन्होंने कहा कि इनके पास अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइलें थी. लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूंगा. बीते 47 वर्षों में यह ईरानी सरकार अमेरिकियों पर हमला करती रही है. इस शैतानी सरकार पर हमला करने का ये हमारा आखिरी मौका था.
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ईरानी सरकार ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जलडमरूमध्य) को बंद कर दिया है और वहां से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को आग लगा देगा. ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है, ईरान वहां से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को आग लगा देगा.
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा खतरे के मद्देनजर जॉर्डन स्थित अमेरिकी दूतावास के सभी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से कैंपस खाली करने का निर्देश दिया गया है. बताया जा रहा है कि मंत्रालय ने इस दूतावास को खाली करा लिया है.
कुवैत की सेना ने बताया कि खाड़ी देश के सशस्त्र बलों द्वारा सोमवार को चलाए गए एक ऑपरेशन के दौरान नौसेना का एक जवान शहीद हो गया. हालांकि, सेना ने जवान की मौत के कारणों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है.
संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत ने मंगलवार को कहा कि इजरायल और अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने ऑपरेशन तब तक नहीं रोकेंगे, जब तक उनका टारगेट पूरा नहीं हो जाता और तेहरान के पास परमाणु क्षमता न हो, ये सुनिश्चित करने के लिए वो हर संभव कोशिश करेंगे.
संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने कहा, 'इजरायल और अमेरिका पूरी ताकत, समन्वय और दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रहे हैं. हम राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को इस नाजुक घड़ी में उनके अडिग नेतृत्व और नैतिक स्पष्टता के लिए धन्यवाद देते हैं... जैसे-जैसे हम शासन को ध्वस्त कर रहे हैं, ईरानी नेतृत्व हताशा में हिंसक हमले कर रहा है. पिछले कुछ दिनों में इजरायल पर मिसाइलें दागी गई हैं... जहां हम सैन्य ठिकानों और आतंकवाद के तंत्र पर सटीक प्रहार कर रहे हैं.'
उन्होंने आगे कहा, 'वहीं ईरानी शासन नागरिकों, परिवारों, हवाई अड्डों और होटलों पर हमले कर रहा है... हम अपने लक्ष्य हासिल करने तक नहीं रुकेंगे... देखिए वो अभी बिना परमाणु हथियार के क्या कर रहे हैं, पूरे क्षेत्र को धमकी दे रहे हैं... अब कल्पना कीजिए कि वही शासन परमाणु क्षमता के साथ कैसा होगा. ये ऐसा जोखिम नहीं है, जिसे हम बर्दाश्त कर सकते हैं... इसीलिए संयुक्त अभियान आवश्यक था...'
अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान को धुआं-धुआं कर दिया है. सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई समेत ईरान की पूरी टॉप लीडरशिप को खत्म कर दिया गया है लेकिन सवाल है कि इसके बावजूद ईरान पलटवार कैसे कर पा रहा है?
इसका सीधा सा जवाब है कि ईरान ने इन परिस्थितियों के लिए खुद को लगभग चार दशकों तक तैयार किया है. ईरान में मचे इसे कोहराम से ईरान की सेना प्रतिशोध की ऐसी आग में जल रही है कि उसने अपनी मिसाइलों और Combat Drones से मिडिल ईस्ट में तबाही मचा दी है. यहां पढ़ें पूरी खबर...