'फिनिश द जॉब...', ट्रंप की एक धमकी और 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया तेल का दाम

मिडिल ईस्ट में जारी ईरान युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल देखी जा रही है. खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. इस बीच ईरान ने तेल और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए हैं.

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ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद मिडिल ईस्ट में हमले तेज (File Photo: ITG) ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद मिडिल ईस्ट में हमले तेज (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:34 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान युद्ध का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हमलों के बाद तेल की आपूर्ति को लेकर आशंका बढ़ी है. इसी वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है.

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होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखने की बात से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता

इस बीच ईरान ने तेल और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं पर अपने हमले तेज कर दिए हैं. इन घटनाओं ने मिडिल ईस्ट के हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है. क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है.

ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने भी बयान दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद ही रहना चाहिए. इस बयान के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में माना जाता है. वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या हमला पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है.

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खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हमलों से बढ़ा तनाव
 

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस मामले में अब "काम पूरा करना" होगा. उनके इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. मौजूदा हालात को देखते हुए वैश्विक बाजार और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
 

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