होर्मुज से भारत के लिए खुशखबरी! अराघची का ऐलान- इन 5 देशों के जहाजों को नहीं रोक रहे

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि भारत समेत पांच देशों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के साथ ईरान की कोई बातचीत नहीं हो रही है. ईरानी मंत्री ने आगे कहा कि ईरान ने अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है और दुनिया को यह दिखा दिया है कि कोई भी देश उसकी सुरक्षा को खतरा नहीं पहुंचा सकता है.

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है. (File Photo- Reuters) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है. (File Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:46 AM IST

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर है. ईरान ने पांच देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है. साथ ही उन्होंने भारत समेत पांच मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का ऐलान किया है.

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अराघची के मुताबिक, भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने दिया गया है. उन्होंने बताया कि इन देशों ने ईरान से संपर्क कर सुरक्षित मार्ग की मांग की थी, जिसके बाद समन्वय के जरिए उन्हें अनुमति दी गई. होर्मुज सिर्फ दुश्मन देशों के लिए बंद है, लेकिन बाकी देशों के लिए खुला है. अराघची ने कहा, 'हम युद्ध की स्थिति में हैं, इसलिए अपने दुश्मनों और उनके सहयोगियों के जहाजों को गुजरने देने का कोई कारण नहीं है.'

उन्होने कहा, 'कई जहाज मालिकों या उन देशों, जिनके ये जहाज हैं, ने हमसे संपर्क किया है और अनुरोध किया है कि हम होर्मुज से उनके जहाजों को सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करें. इनमें से कुछ देशों के लिए, जिन्हें हम मित्र मानते हैं, या ऐसे मामलों में जहां हमने अन्य कारणों से ऐसा करने का फैसला किया है, हमारी सेनाओं ने सुरक्षित मार्ग प्रदान किया है. आपने खबरों में देखा होगा- चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक, भारत (इंडिया के दो जहाज कुछ दिन पहले गुजरे थे) और कुछ अन्य देश, मेरा मानना ​​है कि बांग्लादेश भी, ये वे हैं जिन्होंने हमसे बात की और हमारे साथ तालमेल बिठाया. यह भविष्य में भी जारी रहेगा, युद्ध के बाद भी.'

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उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है. उनके मुताबिक, मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान बातचीत नहीं कहलाता. सरकारी टेलीविजन से बात करते हुए अराघची ने साफ किया कि बैकचैनल से संदेशों का आदान-प्रदान करना औपचारिक कूटनीति नहीं है. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, 'अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है.' 

उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन अलग-अलग माध्यमों से संदेश भेज रहा है, लेकिन तेहरान इसे औपचारिक वार्ता नहीं मानता. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संघर्ष में अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहा है. उनके मुताबिक, अमेरिका न तो जल्दी जीत हासिल कर सका और न ही ईरान में सत्ता परिवर्तन कर पाया.

ईरानी मंत्री ने आगे कहा कि ईरान ने अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है और दुनिया को यह दिखा दिया है कि कोई भी देश उसकी सुरक्षा को खतरा नहीं पहुंचा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहता, लेकिन समाधान उसकी अपनी शर्तों पर ही होगा. उन्होंने कहा, 'ईरान युद्ध नहीं चाहता है, वह इस संघर्ष का स्थायी अंत चाहता है.'

उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन अपनी शर्तों पर, जिसमें भविष्य में हमले न होने की गारंटी और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई शामिल है. होर्मुज पर नियंत्रण दिखाकर ईरान ने अपनी ताकत साबित कर दी है और अमेरिका सहित अन्य देश इसे रोकने में विफल रहे हैं.

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