विरोध की आग में धधक रहा ईरान... खामेनेई की इस वॉर्निंग के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ी

ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन जारी हैं, जिनमें अब तक 648 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. अमेरिका ने ईरान में सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दी है, जबकि ईरान ने जवाबी चेतावनी दी है कि अगर हमला हुआ तो अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा.

Advertisement
ईरान के प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं (Photo: Reuters) ईरान के प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

ईरान में बगावत की आग धधक रही है जहां जनता खामेनेई शासन के खिलाफ पीछे हटने को तैयार नहीं है. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में अब तक 648 लोगों की मौत हो चुकी है. ईरान में हो रहे आंदोलन को अमेरिका खुला समर्थन दे रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि वो ईरान में हस्तक्षेप कर सकते हैं. अमेरिका की इन धमकियों के बीच अब ईरान ने कहा है कि अगर उस पर हमला होता है तो वो चुप नहीं बैठेगा, वो भी युद्ध के लिए तैयार है.

Advertisement

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने सोमवार को अमेरिका को एक बार फिर चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अशांति से जूझ रहे ईरान में हस्तक्षेप करता है, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया जाएगा.

ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी के अनुसार, कालिबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा, 'आइए और देखिए कि क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों और सैन्य ठिकानों का क्या हाल होता है. आइए और ईरानी राष्ट्र की आग में इस कदर जलिए कि यह इतिहास में सभी दमनकारी अमेरिकी शासकों के लिए एक स्थायी सबक बन जाए. अगर आप कुछ करते हैं तो समझ ही जाएंगे कि आपके साथ और इस क्षेत्र के साथ क्या होगा.'

अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान में प्रदर्शनों को देखते हुए वहां सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं. ट्रंप ने रविवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा था, 'सेना इस पर नजर बनाए हुए है और हम कुछ बेहद कड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. हम फैसला करेंगे.'

Advertisement

कतर के एयर बेस पर अमेरिका ने बढ़ाई गतिविधि

अमेरिका ने इस बीच मध्य-पूर्व में अपने सबसे बड़े मिलिट्री बेस कतर के अल उदैद एयर बेस पर अपने युद्धक विमानों की गतिविधियां बढ़ा दी है.

ईरान की सीमा से करीब 200 से 300 किलोमीटर दूर स्थित कतर के अल उदैद एयर बेस पर अमेरिकी फाइटर जेट्स की गतिविधियों में इजाफा हुआ है. इसी बीच अमेरिकी सरकार ने एक आपात अलर्ट जारी कर अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने का आग्रह किया है.

इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार रात अल उदैद एयर बेस से कई अमेरिकी युद्धक विमानों ने उड़ान भरी, जिनमें KC-135 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और B-52 रणनीतिक बॉम्बर शामिल थे.

दोहा से लगभग 35 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित यह एयर बेस 10 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिकों का ठिकाना है. यह क्षेत्र में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक है. यहां 4,500 मीटर लंबा रनवे है, जिस पर B-52 जैसे बड़े स्ट्रैटजिक बॉम्बर और सैन्य परिवहन विमान आसानी से उतर सकते हैं और उड़ान भर सकते हैं.

प्रदर्शनों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा

ईरान में देशभर में जारी प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 646 हो गई है. हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि मरने वालों की संख्या इसके कई गुना अधिक हो सकती है.

Advertisement

यह आंकड़ा अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) की ओर से जारी किया गया है. यह समूह पिछले कई सालों के प्रदर्शनों के दौरान लगातार सटीक जानकारी देता रहा है. एजेंसी ईरान के भीतर सक्रिय एक्टिविस्ट्स के एक नेटवर्क पर निर्भर करती है, जो सभी रिपोर्ट की गई मौतों की पुष्टि करता 
है.

प्रदर्शनों को देखते हुए ईरान ने देशभर में इंटरनेट बैन कर दिया है और स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट को भी लगभग जैम कर दिया गया है. मीडिया पर पाबंदी की वजह से ईरान के प्रदर्शनों के पैमाने को समझना मुश्किल बना हुआ है. ईरानी सरकारी मीडिया ने इन प्रदर्शनों के बारे में बहुत कम जानकारी दी है. सोशल मीडिया पर शेयर कुछ वीडियो में प्रदर्शन कर रहे लोग और गोलियों की आवाज सुनी जा सकती है.

इन पाबंदियों के बावजूद, प्रदर्शन रुकते हुए नहीं दिख रहे हैं. प्रदर्शनकारियों पर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की उस धमकी का भी असर नहीं हो रहा जिसमें उन्होंने कहा था 'दंगाइयों को उनकी सही जगह दिखा देंगे.'

प्रदर्शनों की शुरुआत क्यों हुई?

ईरान की मुद्रा ईरानी रियाल की भारी गिरावट के कारण ईरान का आर्थिक संकट और गहराता गया है. ईरान के लोग खाने-पीने की बढ़ती कीमतों और पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं. देश लंबे समय से करीब 40 प्रतिशत की वार्षिक महंगाई दर से जूझ रहा है.

Advertisement

प्रदर्शन दिसंबर के अंत में तेहरान में व्यापारियों ने शुरू किए जो धीरे-धीरे अन्य इलाकों में फैल गए. शुरुआत में आंदोलन का केंद्र आर्थिक मुद्दे थे, लेकिन जल्द ही प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे भी लगाने शुरू कर दिए. लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा काफी समय से सुलग रहा था, खासकर 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत के बाद, जिसने देशव्यापी प्रदर्शनों को जन्म दिया था.

कुछ प्रदर्शनकारियों ने ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में भी नारे लगाए हैं. रजा पहलवी ने भी विरोध-प्रदर्शनों का आह्वान किया है जिसके बाद प्रदर्शन और अधिक व्यापक हुए हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement