रूस-चीन के साथ ईरान की गुटबाजी, एकजुट हुए BRICS के कई देश... क्या समुद्र में चल रही जंग की तैयारी?

दक्षिण अफ्रीका के समुद्री क्षेत्र में चीन, रूस और ईरान ने संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है. इसे BRICS Plus देशों का समुद्री सुरक्षा अभ्यास बताया जा रहा है, लेकिन अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच इसे रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है.

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रूस-चीन-ईरान की नौसेनाएं दक्षिण अफ्रीका के वॉटर में एक्सरसाइज कर रही हैं. (Photo- Reuters) रूस-चीन-ईरान की नौसेनाएं दक्षिण अफ्रीका के वॉटर में एक्सरसाइज कर रही हैं. (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:47 PM IST

रूस, चीन और ईरान में बढ़ती रणनीतिक नज़दीकियों के बीच एक बड़ा संकेत दक्षिण अफ्रीका के समुद्री क्षेत्र से सामने आया है. तीनों देशों ने BRICS Plus के तहत एक सप्ताह तक चलने वाले संयुक्त नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत की है. दक्षिण अफ्रीका ने इसे समुद्री व्यापार और शिपिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़ा अभ्यास बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मौजूदा माहौल में इसके मायने इससे कहीं आगे जाते दिख रहे हैं.

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यह अभ्यास ऐसे समय शुरू हुआ है जब अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ कई BRICS Plus सदस्यों के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है. BRICS Plus, मूल BRICS समूह का विस्तारित रूप है, जिसमें अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, इंडोनेशिया और इथियोपिया जैसे देश शामिल हैं. इसे पश्चिमी आर्थिक और रणनीतिक वर्चस्व के विकल्प के रूप में देखा जाता है.

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दक्षिण अफ्रीका की सेना के मुताबिक यह अभ्यास 'विल फॉर पीस 2026' के तहत हो रहा है, जिसमें समुद्री सुरक्षा, संयुक्त संचालन और आपसी तालमेल बढ़ाने पर फोकस किया गया है. चीनी सैन्य अधिकारियों ने उद्घाटन समारोह में बताया कि ब्राजील, मिस्र और इथियोपिया इस अभ्यास में पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हैं. दक्षिण अफ्रीकी सेना का कहना है कि BRICS Plus के सभी सदस्य देशों को इसमें भाग लेने का न्योता दिया गया था.

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हालांकि, देश के भीतर ही इस अभ्यास को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है. दक्षिण अफ्रीका की सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल प्रो-वेस्टर्न डेमोक्रेटिक एलायंस पार्टी ने इसे देश की घोषित तटस्थ नीति के खिलाफ बताया है. पार्टी का आरोप है कि BRICS के जरिए दक्षिण अफ्रीका को वैश्विक शक्ति संघर्ष में मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.

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इन आरोपों को खारिज करते हुए दक्षिण अफ्रीकी सेना के संयुक्त अभियानों के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल म्फो माथेबुला ने कहा कि यह कोई राजनीतिक या अमेरिका-विरोधी पहल नहीं है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि दक्षिण अफ्रीका समय-समय पर अमेरिकी नौसेना के साथ भी ऐसे अभ्यास करता रहा है.

इसके बावजूद, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा BRICS देशों पर 'एंटी-अमेरिकन' एजेंडा चलाने के आरोप और टैरिफ की धमकियों के बीच यह नौसैनिक अभ्यास वैश्विक भू-राजनीति में नए सवाल खड़े कर रहा है. क्या यह सिर्फ सुरक्षा अभ्यास है या समुद्र में बदलते शक्ति संतुलन का संकेत, यह आने वाले समय में और साफ होगा.

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