अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ चल रही जंग के बीच होर्मुज की खाड़ी के पास अचानक से जहाजों के कई ग्रुप दिखाई देने लगे हैं. माना जा रहा है कि होर्मुज की खाड़ी में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के असर की वजह से ऐसा हो रहा है.
ब्लूमबर्ग की तरफ से जमा किए गए ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, कुछ ग्रुप में 200 से ज्यादा जहाज शामिल हैं. इनमें हर तरह के जहाज दिखाई दे रहे हैं और कुछ जहाज ऐसे भी दिख रहे हैं जो 100 नॉट्स से ज्यादा की रफ्तार से चलते हुए नजर आ रहे हैं.
होर्मुज की खाड़ी वैश्विक व्यापार, खासकर तेल व्यापार के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है जिसके जरिए मिडिल ईस्ट के देश अपना तेल और गैस सप्लाई करते हैं. युद्ध के बीच ईरान ने इस खाड़ी को बंद कर दिया है जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारी उथल-पुथल मच गई है. ऐसे में निवेशकों की नजर इस समुद्री रास्ते पर टिकी हुई है.
फारस की खाड़ी के तेल उत्पादक देशों को अपना तेल उत्पादन घटाना पड़ा है क्योंकि तेल का निर्यात न हो पाने से उनका तेल वैसे ही पड़ा हुआ है. उनका तेल भंडार भर गया है और नए उत्पादित तेल को रखने की जगह नहीं बची है जिस कारण वो तेल उत्पादन कम कर रहे हैं.
तेल की सप्लाई रुकने से शुरुआत में ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. हालांकि, मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ये संकेत देने के बाद कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, कीमतों में भारी गिरावट आई है.
होर्मुज की खाड़ी में कौन जहाज कहां है, बताना मुश्किल
स्टारबोर्ड मैरीटाइम इंटेलिजेंस के समुद्री विश्लेषक मार्क डगलस ने कहा कि पिछले 48 घंटों में स्थिति लगभग अभेद्य हो गई है. उन्होंने कहा कि ट्रैकिंग डेटा के आधार पर यह बताना लगभग असंभव हो गया है कि खाड़ी के आसपास कोई जहाज वास्तव में कहां मौजूद है.
डेटा के मुताबिक, कुछ जहाजों के ग्रुप अजीब शेप बनाते हुए खाड़ी में घूम रहे हैं. उदाहरण के तौर पर अबू धाबी के पास समुद्र में जहाजों का एक गोल घेरा दिखाई दे रहा है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रुवैस के पास उल्टे 'Z' के आकार का जहाजों का ग्रुप नजर आया है.
इसके अलावा ओमान की खाड़ी में भी कुछ समूह दिखाई दिए हैं. माना जा रहा है कि ये जहाज तनाव कम होने का इंतजार कर रहे हैं या होर्मुज में प्रवेश से पहले सुरक्षित लोडिंग समय का इंतजार कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि जहाजों के इस तरह के असामान्य पैटर्न बताते हैं कि जहाजों के नेविगेशन सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए छेड़छाड़ की जा रही है. इससे ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर जहाज अपनी असली जगह से अलग जगह पर दिखाई देने लगते हैं. आम तौर पर जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो सेनाएं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के तहत ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं.
इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से जहाजों की स्पीड भा गड़बड़ दिख रही
इस जैमिंग की वजह से जहाजों की स्पीड भी गड़बड़ दिखाई जाती है. उदाहरण के तौर पर 2013 में बना प्रोडक्ट्स टैंकर 'Asprouda' सोमवार को जेबेल अली के पास 102.2 नॉट्स की रफ्तार से चलता हुआ दिखा, जो करीब 190 किलोमीटर प्रति घंटा के बराबर है. जबकि ऐसे टैंकरों की अधिकतम सामान्य रफ्तार लगभग 16 नॉट्स होती है.
इतने बड़े पैमाने पर जहाजों के ग्रुप दिखाई देने से इस क्षेत्र में काम कर रहे जहाज मालिकों और चार्टर कंपनियों की चिंता और बढ़ सकती है. युद्ध लंबा खिंचने के बाद पहले से ही वॉर-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम तेजी से बढ़ रहे हैं और कई जहाजों को मिसाइलों से निशाना बनाया जा चुका है.
मैरीटाइम इंटेलिजेंस कंपनी विंडवर्ड के मुताबिक, संघर्ष की शुरुआत के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग शुरू हो गई थी और फारस की खाड़ी में 1100 से ज्यादा जहाज इससे प्रभावित हुए. 4 मार्च को होर्मुज से सिर्फ पांच जहाजों ने गुजरने की सूचना मिली, जबकि 26 फरवरी को यहां से 120 जहाजों की आवाजाही हुई थी.
होर्मुज की खाड़ी को कंट्रोल में लेने की ट्रंप की इच्छा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह संभावना भी जताई है कि अमेरिका जहाजों को बीमा सुरक्षा और नौसेना की एस्कॉर्ट सुविधा दे सकता है, ताकि होर्मुज के जरिए समुद्री यातायात फिर से सामान्य हो सके. ये खाड़ी फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है.
ट्रंप ने सीबीएस को दिए एक इंटरव्यू में ये भी कहा कि वो इस खाड़ी को अपने कंट्रोल में लेने की सोच रहे हैं, हालांकि उन्होंने ये साफ नहीं किया कि इसके लिए कौन से कदम उठाए जा सकते हैं.
मार्क डगलस ने कहा कि इस क्षेत्र में चल रहे जहाज अब जीपीएस पर भरोसा नहीं कर सकते. उनके मुताबिक इससे सुरक्षा स्थिति और जटिल हो गई है, खासकर तब जब पहले ही कई जहाज हमलों का शिकार हो चुके हैं.
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