इंडोनेशिया में एक कपल को शादी से पहले यौन संबंध बनाने और शराब पीने का दोषी पाए जाने को लेकर सरेआम 140 कोड़े मारे गए हैं. यह घटना इंडोनेशिया के आचे प्रांत की है जहां इस्लाम का कट्टर शरिया कानून लागू है. कोड़े मारे जाने के दौरान महिला को इतनी जोर से चोट लगी कि वो बेहोश हो गई जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया.
ब्रिटेन के अखबार, 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, अविवाहित प्रेमी जोड़े को सजा गुरुवार को आचे प्रांत की राजधानी बांडा आचे में दी गई.
इस्लामी कानून में विवाह के इतर संबंध और शराब पीने को अपराध माना जाता है. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि शरिया कानून लागू होने के 20 साल से ज्यादा समय में यह सबसे कठोर सजाओं में से एक है.
आचे, सुमात्रा के उत्तरी सिरे पर स्थित है, इंडोनेशिया का एकमात्र प्रांत है जहां शरिया कानून लागू करने की इजाजत है. इंडोनेशिया की सरकार ने 2001 में विशेष स्वायत्तता के तहत आचे को यह अधिकार दिया था. इस कानून के तहत जुआ खेलना, शराब पीना और अविवाहित जोड़ों के बीच अंतरंग संबंध जैसे अपराधों पर सरेआम कोड़े मारने की सजा का प्रावधान है.
संबंध बनाने और शराब पीने के लिए मारे गए 140 कोड़े
अधिकारियों के अनुसार, प्रेमी और उसकी प्रेमिका को विवाह से इतर संबंध बनाने के लिए 100 कोड़े और शराब पीने के लिए 40 कोड़े यानी कुल मिलाकर 140 कोड़े मारे गए. दोनों को पब्लिक पार्क में बेंत से मारा गया जहां दर्जनों लोग मौजूद थे.
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, कोड़े लगने के दौरान महिला बेहोश हो गई, जिसके बाद उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया.
बांडा आचे के शरिया पुलिस प्रमुख मोहम्मद रिजाल ने बताया कि उसी दिन इस्लामी कानून के उल्लंघन के आरोप में कुल छह लोगों को सजा दी गई. इनमें शरिया पुलिस का एक मेंबर और उसकी महिला साथी भी शामिल थे. उन पर आरोप था कि वो एक निजी स्थान पर एकसाथ थे. दोनों को 23-23 कोड़े मारे गए.
रिजाल के हवाले से कहा गया, 'जैसा वादा किया था, हम किसी को भी छूट नहीं देते, खासकर अपने लोगों को तो बिल्कुल भी नहीं. इससे हमारी छवि को नुकसान पहुंचता है.'
आलोचना के बावजूद, इंडोनेशिया में दी जाती है कोड़े मारने की सजा
आचे में दोषियों को सरेआम कोड़े मारने की सजा आज भी आम है और मानवाधिकार संगठनों की ओर से इसकी लगातार आलोचना होती रही है. इन संगठनों का कहना है कि यह प्रथा क्रूर और अपमानजनक है. आमतौर पर ऐसी सजाएं बीच चौराहे पर दी जाती हैं और बड़ी संख्या में लोग इसे देखने जुटते हैं.
पिछले साल भी शरिया अदालत ने दो पुरुषों को 76-76 कोड़े मारने की सजा दी थी. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस प्रथा की बार-बार निंदा की है. मानवाधिकार संगठन इसे स्टेट स्पॉन्सर क्रूरता और भेदभाव कहते हैं. मानवाधिकार संगठनों ने इंडोनेशियाई अधिकारियों से इस प्रथा को समाप्त करने की मांग दोहराई है.
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