पूर्वी लद्दाख में पांच साल तक चले सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के रिश्तों में जमी बर्फ अब तेजी से पिघलती नजर आ रही है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को कहा कि दोनों देशों के संबंध सुधार और विकास की सही राह पर चल पड़े हैं और उनके साझा हित मतभेदों की तुलना में कहीं अधिक बड़े हैं.
चीनी विदेश मंत्री ने यह बातें भारत के निवर्तमान राजदूत प्रदीप कुमार रावत से विदाई मुलाकात के दौरान कहीं.
वांग यी ने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में द्विपक्षीय संबंधों में सुधार और विकास की दिशा में प्रगति हो रही है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच चीन भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है और दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए.
गौरतलब है कि 2020 में गलवान वैली में सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के रिश्ते कई वर्षों तक तनावपूर्ण रहे. हालांकि, 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात और बाद में तियानजिन में हुई बातचीत के बाद संबंधों में सुधार के संकेत मिले. इस साल भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना है.
पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों ने रिश्तों को स्थिर करने के लिए प्रयास तेज किए हैं और संवाद के जरिए नई शुरुआत की कोशिश की जा रही है. वांग यी ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े उभरते देशों के बिना दुनिया का आधुनिकीकरण संभव नहीं है.
वांग यी ने निवर्तमान भारतीय राजदूत प्रदीप रावत के योगदान की सराहना की. रावत इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त हो रहे हैं. उनकी जगह ब्रिटेन में भारत के वर्तमान उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी बीजिंग में भारत के नए राजदूत के रूप में कार्यभार संभालेंगे.
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