'भारत जितना तेल लेना चाहे...', रशियन ऑयल पर खींचतान के बीच बोले मार्को रुबियो

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज संकट के बीच अमेरिका अब भारत को बड़ा एनर्जी पार्टनर बनाने की कोशिश में जुट गया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे से पहले साफ कहा कि वॉशिंगटन भारत को "जितनी ऊर्जा चाहिए, उतनी बेचने" को तैयार है.

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भारत दौरे पर आ रहे मार्को रुबियो (Photo: Reuters) भारत दौरे पर आ रहे मार्को रुबियो (Photo: Reuters)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:19 AM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज स्ट्रेट में संकट और ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर मंडरा रहे खतरे के बीच अमेरिका ने भारत को लेकर बड़ा संदेश दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली रवाना होने से पहले कहा कि अमेरिका भारत को "जितना तेल और गैस चाहिए, उतना देने" के लिए तैयार है.

मियामी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा, "हम भारत को जितनी ऊर्जा खरीदनी हो, उतनी बेचना चाहते हैं. अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर तेल और गैस का उत्पादन और निर्यात कर रहा है."

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रुबियो 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे. यह उनका अमेरिकी विदेश मंत्री बनने के बाद पहला भारत दौरा होगा. इस दौरान वे कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली जाएंगे. उनके एजेंडे में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे मुद्दे शामिल हैं.

भारत बड़े तेल आयातकों में शामिल

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है और उसकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें मध्य पूर्व से पूरी होती हैं. लेकिन ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर ने नई दिल्ली की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में अमेरिका खुद को भारत के लिए "विश्वसनीय सप्लायर" के तौर पर पेश करना चाहता है.

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रुबियो ने कहा कि अमेरिका पहले से ही भारत के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि अमेरिकी ऊर्जा भारत के आयात पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा बने." उन्होंने वेनेजुएला के तेल का भी जिक्र किया और संकेत दिया कि इस मोर्चे पर भी भारत के साथ संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं. रुबियो ने कहा कि वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति अगले हफ्ते भारत आ सकते हैं और ऊर्जा सहयोग पर बातचीत हो सकती है.

भारत ऊर्जा सप्लाई को डाइवर्सिफाई कर रहा

अमेरिका की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारत अपनी ऊर्जा सप्लाई को डाइवर्सिफाई करने में जुटा है. रूस से तेल खरीद बढ़ाने के बावजूद भारत की कोशिश ये है कि किसी एक क्षेत्र पर उसकी निर्भरता बहुत ज्यादा न हो. यही वजह है कि अमेरिका अब इस मौके को रणनीतिक तौर पर देख रहा है.

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रुबियो ने भारत को "महत्वपूर्ण साझेदार" बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं. उन्होंने कहा, "भारत हमारा शानदार पार्टनर है. हम उनके साथ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और यह यात्रा बेहद अहम है."

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नई दिल्ली में रुबियो क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे. इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री स्थिरता और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.

सर्जियो गोर ने ट्रेड डील पर दिया बड़ा बयान

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मकसद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को इस तरह बढ़ाना है, जिससे अमेरिकी कंपनियों और वहां के कर्मचारियों को बड़े आर्थिक मौके मिल सकें. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है और उम्मीद है कि बातचीत शुरू होने के करीब डेढ़ साल के भीतर यह समझौता पूरा हो सकता है. राजदूत ने भरोसा जताया कि आने वाले कुछ हफ्तों और महीनों में दोनों देशों के बीच यह अहम ट्रेड डील फाइनल हो सकती है.

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