ग्रीनलैंड पर ट्रंप करना चाहते हैं कब्जा... लेकिन क्या इससे खुश हैं अमेरिकन? सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की अपनी इच्छा जाहिर की है, इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि "कुछ समाधान हो जाएगा." ट्रंप की इस स्थिति के बाद डेनमार्क-ग्रीनलैंड में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, और सर्वे से पता चलता है कि ट्रंप के इस संभावित फैसले से अमेरिकी भी खुश नहीं हैं.

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ट्रंप चाहते हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका के नियंत्रण में रहे. (Photo- ITG) ट्रंप चाहते हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका के नियंत्रण में रहे. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:01 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण की अपनी इच्छा को दोहराया है, जिससे अमेरिका और डेनमार्क के बीच पहले से ही गरमाता तनाव और बढ़ गया है. ट्रंप के इस रुख ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए उबाल पैदा किया है, खासकर तब जब अमेरिका, रूस और चीन जैसी वैश्विक ताकतें आर्कटिक संसाधनों और रणनीतिक ठिकानों के लिए खींचतान कर रही हैं.

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ट्रंप ने "कुछ समाधान हो जाएगा" जैसी टिप्पणियों के साथ कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके भविष्य पर अमेरिका की नजर है. हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि उनका क्षेत्र "बिकाऊ नहीं" है और वे अपने स्वायत्तता और पहचान की रक्षा करना चाहते हैं.

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ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में और डेनमार्क की कोपेनहेगेन में हजारों लोगों ने "Hands off Greenland" जैसे नारे लगा कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें आत्मनिर्णय और संप्रभुता के समर्थन की जोरदार मांग की गई. इस बीच एक सर्वे से पता चला कि पांच में एक शख्स भी पूरी तौर पर सहमत नहीं है कि ट्रंप को ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहिए. वहीं दस में सिर्फ एक अमेरिकी ऐसा है, जो चाहता है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य कार्रवाई करनी चाहिए.

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17% ही अमेरिकन ट्रंप का कर रहे समर्थन

हाल के एक Reuters/Ipsos सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि सिर्फ 17% अमेरिकियों ने ट्रंप के ग्रीनलैंड पर दावे का समर्थन किया है, जबकि अधिकांश जनता और रिपब्लिकन व डेमोक्रेट दोनों तरफ के मतदाताओं ने इसके खिलाफ अपनी नाराजगी जताई है. अधिकांश ने सैन्य बल के इस्तेमाल और हस्तक्षेप के खिलाफ अपनी चिंता व्यक्त की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ट्रंप की कूटनीतिक इच्छाओं को व्यापक घरेलू समर्थन नहीं मिल रहा है.

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डेनमार्क-ग्रीनलैंड ने ट्रंप की मंशा का विरोध किया

डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने भी अमेरिका के रुख का विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और उसका भविष्य अंतरराष्ट्रीय कानून और स्थानीय जनता की इच्छाओं के अनुरूप तय होना चाहिए. ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडेरिक नीलसेन ने कहा है कि क्षेत्र "किसी भी हालत में" अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा, और यह निर्णय डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही करेंगे.

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इस बीच, यूरोपीय देशों ने भी ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया है और ग्रीनलैंड में कमेबोश 37-38 सैनिक भेजे हैं. ट्रंप ने इन तैनाती को भी नजरअंदाज करते हुए कहा कि वे अमेरिकी निर्णय को प्रभावित नहीं कर पाएंगे. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस समेत आठ देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की भी चेतावनी दी है, जिन्होंने ग्रीनलैंड के बचाव में वहां सैनिक तैनात किए हैं.

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