सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पाकिस्तान में आम चुनाव का कार्यक्रम जारी, 19 दिसंबर से शुरू होगी प्रक्रिया

ईसीपी ने कहा कि यह चुनाव कार्यक्रम नेशनल असेंबली के साथ ही पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की चार प्रांतीय विधानसभाओं में महिलाओं और गैर-मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होता है.

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पाकिस्तान के इलेक्शन कमीशन ने देश में आम चुनावों का कार्यक्रम जारी कर दिया है. (सांकेतिक तस्वीर) पाकिस्तान के इलेक्शन कमीशन ने देश में आम चुनावों का कार्यक्रम जारी कर दिया है. (सांकेतिक तस्वीर)

aajtak.in

  • इस्लामाबाद,
  • 16 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 7:33 PM IST

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ही पाकिस्तान चुनाव आयोग (ECP) ने शुक्रवार रात 8 फरवरी, 2024 को होने वाले आम चुनावों के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया. मतदान प्रक्रिया 19 दिसंबर को शुरू होगी, जब रिटर्निंग अधिकारी (RO) एक सार्वजनिक नोटिस जारी करेंगे. जल्द ही ईसीपी रिटर्निंग ऑफिसर्स और डिस्ट्रिक्ट रिटर्निंग ऑफिसर्स की ट्रेनिंग शुरू करेगा.

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ईसीपी ने कहा कि यह चुनाव कार्यक्रम नेशनल असेंबली के साथ ही पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की चार प्रांतीय विधानसभाओं में महिलाओं और गैर-मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होता है. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत जाते हुए कार्यकारी शाखा से आरओ और डीआरओ की नियुक्ति के लिए निर्वाचन आयोग की अधिसूचना को निलंबित कर दिया था. 

लाहौर हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

लाहौर हाई कोर्ट का फैसला पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) द्वारा दायर एक याचिका पर जारी किया गया था. पीटीआई ने ही सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में समय पर चुनाव कराने की मांग की थी. विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, निर्वाचन आयोग ने लाहौर एचसी के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार की और समय पुर आम चुनाव कराने का आदेश देते हुए लाहौर हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया.

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बता दें कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर नेशनल असेंबली को उसके 5 साल के कार्यकाल के पूरा होने से 3 दिन पहले भंग कर दिया था. पूर्व सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए निचले सदन को समय से पहले भंग कर दिया कि पाकिस्तान के संविधान के अनुरूप चुनाव 90 दिन बाद निर्धारित हों. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि ईसीपी ने 90 दिनों की समय सीमा का पालन करने में असमर्थता जताई.

8 फरवरी 2024 तक मदान संपन्न कराने पर सहमति

ईसीपी ने कहा कि काउंसिल ऑफ कॉमन इंटरेस्ट्स (सीसीआई) द्वारा 2023 डिजिटल जनगणना के परिणामों को मंजूरी देने के बाद उसे निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से परिसीमन पर काम करना था. ईसीपी के फैसले के बाद, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और कई अन्य ने समय पर चुनाव कराने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, उसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ईसीपी और राष्ट्रपति को आपस में विचार-विमर्श करने का आदेश दिया, जिसके परिणामस्वरूप 8 फरवरी 2024 तक चुनाव संपन्न कराने पर आम सहमति बनी.

राजनीतिक दलों ने चुनाव का स्वागत किया
पाकिस्तान के राजनीतिक दलों ने शीर्ष अदालत द्वारा की गई चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का स्वागत किया. इमरान खान के नेतृत्व वाले दल को छोड़कर पाकिस्तान के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने शनिवार को 8 फरवरी के आम चुनावों के कार्यक्रम की सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई घोषणा का स्वागत किया और कहा कि शीर्ष अदालत ने चुनावों में देरी करने की एक "बड़ी साजिश" को नाकाम कर दिया है और लोकतंत्र को बचाया है.

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा नौकरशाहों को रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के रूप में नियुक्त करने के लाहौर हाई कोर्ट (एलएचसी) के आदेश को निलंबित करने के बाद पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने शुक्रवार देर रात चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की.

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ ने सुप्रीम कोर्ट की प्रशंसा की और एक्स पर पोस्ट किया, ' कोर्ट ने लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ पीटीआई की साजिश को विफल कर दिया. 8 फरवरी को चुनाव सुनिश्चित करने का सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला लोकतंत्र को मजबूत करेगा और संविधान की रक्षा करेगा.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया गया कि 'इमरान खान की पीटीआई चुनाव नहीं चाहती थी.'

पीएमएल-एन नेता इशाक डार ने कहा कि चुनाव कराना ईसीपी की एकमात्र जिम्मेदारी है क्योंकि परिस्थितियां और संविधान समय पर चुनाव की मांग करते हैं. कराची में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) के अमीनुल हक ने फैसले का स्वागत किया और कहा, इसने आम चुनावों को लेकर अनिश्चितताओं और अटकलों पर विराम लगा दिया है.

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