दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए 80 साल पहले गठित संयुक्त राष्ट्र का अस्तित्व का क्या खत्म हो जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इससे जुड़े सुझाव ने वर्ल्ड पॉलिटिक्स पर नजर रखने वालों को चिंता में डाल दिया है. यह बोर्ड मूल रूप से गाजा के पुनर्निर्माण और शांति योजना की निगरानी के लिए बनाया गया था. इसे UN सिक्योरिटी काउंसिल ने एक प्रस्ताव के जरिये मंजूरी दी थी. ट्रंप स्वयं इस बोर्ड के चेयरमैन हैं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक वे इस बोर्ड के आजीवन चेयरमैन रह सकते हैं.
ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र की आलोचना करते हुए कहा था कि उनका बोर्ड इस इंटरनेशनल संस्था की जगह ले सकता है.
UN कारगर नहीं रहा
व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा, "UN ज़्यादा मददगार नहीं रहा है. मैं UN की क्षमता का बहुत बड़ा फैन हूं, लेकिन यह कभी भी अपनी क्षमता के हिसाब से काम नहीं कर पाया है." "जिन सभी लड़ाइयों को मैंने सुलझाया, उन्हें UN को सुलझाना चाहिए था. मैं कभी उनके पास नहीं गया, मैंने तो उनके पास जाने के बारे में सोचा भी नहीं."
जब ट्रंप से सीधे पूछा गया कि क्या Board of Peace UN को रिप्लेस करेगा? तो ट्रंप ने कहा: "It might." यानी कि ऐसा हो सकता है.
हालांकि ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि UN को आगे चलने देना चाहिए. क्योंकि इसकी संभावनाएं बहुत बड़ी है.
लेकिन ट्रंप की टिप्पणियों ने ऐसी बहस को तो जन्म दे दी दिया है.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने अभी-अभी बोर्ड ऑफ पीस बनाया है, "जो मुझे लगता है कि बहुत बढ़िया होगा." उन्होंने कहा, "काश यूनाइटेड नेशंस और ज़्यादा कर पाता. काश हमें बोर्ड ऑफ पीस की जरूरत ही नहीं पड़ती." हमेशा की तरह ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में आठ युद्ध सुलझाए.
ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसकी स्थापना जनवरी 2026 में हुई. यह मूल रूप से गाजा संघर्ष समाप्त करने के ट्रंप के 20-पॉइंट प्लान की निगरानी, पुनर्निर्माण और शांति सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है. ट्रंप खुद इसके चेयरमैन हैं. लेकिन यह संस्था अब गाजा से आगे बढ़कर वैश्विक संघर्षों में हस्तक्षेप करने की महत्वाकांक्षा रखता है.
ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड में कौन कौन हैं?
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को एक "फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड (गाजा पीस बोर्ड)" की घोषणा की है. जिसमें ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर शामिल हैं.
CNN ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि ट्रंप बोर्ड के अनिश्चित काल के लिए चेयरमैन रहेंगे, जो राष्ट्रपति के तौर पर उनके दूसरे कार्यकाल की अवधि के बाद भी जारी रह सकता है. ट्रंप को केवल "अपनी मर्ज़ी से इस्तीफा देने या अक्षमता के कारण" ही बदला जाएगा, जिसका फैसला एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सर्वसम्मत वोट से होगा. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि भविष्य का कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अलावा बोर्ड में अमेरिकी प्रतिनिधि को नियुक्त या नामित कर सकता है.
इस बोर्ड में शामिल होने के लिए ट्रंप ने भारत, रूस, चीन, फ्रांस समेत कई देशों को न्योता दिया है. बता दें कि ट्रंप ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए 1 बिलियन डॉलर की फीस रखी है.
ट्रंप की महात्वाकांक्षाओं को रेड सिग्नल
आयरलैंड की विदेश मंत्री हेलेन मैकएनटी ने कहा कि, "संयुक्त राष्ट्र के पास अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का एक अनोखा जनादेश है, और देशों को एक साथ लाकर साझा चुनौतियों का समाधान खोजने की वैधता है. भले ही यह परफेक्ट न हो, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रधानता अब पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है."
मंगलवार को UN के टॉप अधिकारी टॉम फ्लेचर ने कहा कि ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस उनके संगठन की जगह नहीं लेगा.
अमेरिका के पूर्व मिडिल ईस्ट वार्ताकार एरॉन डेविड मिलर ने इस बात पर संदेह जताया कि UN के काम को बोर्ड ऑफ पीस कर पाएगा.
उन्होंने कहा, "मुझे समझ नहीं आता कि आप इसका इस्तेमाल कैसे करेंगे." "संघर्ष बाहरी संगठनों से नहीं, बल्कि दो विरोधी पक्षों के साथ काम करने वाले मध्यस्थों से सुलझाए जाते हैं."
ट्रंप बुधवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरस में शिरकत करने स्विटजरलैंड के दावोस शहर आ रहे हैं. इस शहर में अगले कुछ घंटों में गहन राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं.
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