इमिग्रेशन में कटौती के बावजूद छात्रों की पहली पसंद कनाडा! UK से कहीं ज्यादा आसान है PR का रास्ता

इमिग्रेशन में कटौती और सख्त नियमों के बावजूद, कनाडा में पढ़ाई के बाद काम करने और फिर स्थायी निवास पाने का रास्ता अब भी UK के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान और तेज है. यही वजह है कि स्टडी-टू-इमिग्रेट के मामले में कनाडा ने यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ दिया है.

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इमिग्रेशन कटौती के बावजूद कनाडा क्यों आगे निकल गया इमिग्रेशन कटौती के बावजूद कनाडा क्यों आगे निकल गया

हुमरा असद

  • टोरोंटो,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:45 AM IST

पढ़ाई के ज़रिए विदेश में बसने का सपना देखने वाले लोगों के लिए कनाडा अब यूनाइटेड किंगडम (UK) से ज्यादा आसान और सीधा विकल्प बनकर उभरा है. हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, “स्टडी-टू-इमिग्रेट” यानी पढ़ाई के बाद स्थायी निवास पाने के मामले में कनाडा ने UK को पीछे छोड़ दिया है.

पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई देशों की तरह कनाडा और UK दोनों ने इमिग्रेशन नियमों में सख्ती की है. जनसंख्या दबाव, आवास संकट और जनभावना में बदलाव के चलते सरकारें इमिग्रेशन कम करने के फैसले ले रही हैं. इसके बावजूद, पढ़ाई के बाद स्थायी रूप से बसने के लिहाज़ से कनाडा का सिस्टम आज भी ज्यादा साफ, तेज और भरोसेमंद माना जा रहा है.

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कनाडा में पढ़ाई के बाद PR तक जल्दी पहुंच

कनाडा में उच्च शिक्षा पूरी करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्र ग्रेजुएट होने के महज एक साल के अंदर ही देश के प्रमुख स्थायी निवास कार्यक्रमों के लिए पात्र हो सकते हैं. इसके उलट, UK में छात्रों को स्थायी निवास पाने के लिए कम से कम 5 साल इंतज़ार करना पड़ता है और सरकार इसे 10 साल तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है.

कनाडा में स्थायी निवास को Permanent Residence (PR) कहा जाता है, जबकि UK में इसे Indefinite Leave to Remain (ILR) कहा जाता है. दोनों ही देशों में यह दर्जा मिलने के बाद व्यक्ति को अनिश्चित समय तक रहने और काम करने की कानूनी अनुमति मिल जाती है. हालांकि, स्थायी निवास कहीं भी गारंटी नहीं होता, लेकिन कनाडा में यह रास्ता UK के मुकाबले ज्यादा सीधा और तेज़ है.

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पढ़ाई के बाद काम करने में भी कनाडा आगे

स्थायी निवास के लिए दोनों देशों में स्थानीय काम का अनुभव बेहद अहम होता है. यहीं से दोनों देशों के नियमों में बड़ा फर्क सामने आता है. कनाडा में पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) दिया जाता है, जिसकी वैधता तीन साल तक हो सकती है. यह परमिट

  • दो साल या उससे ज्यादा के कोर्स
  • या एक साल के मास्टर प्रोग्राम करने वाले छात्रों को भी मिल सकता है.

वहीं UK में नियम लगातार सख्त हुए हैं.

  • PhD करने वाले छात्रों को 3 साल का ग्रेजुएट वीज़ा
  • 2026 में ग्रेजुएट या पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों को अधिकतम 2 साल
  • और 1 जनवरी 2027 के बाद आवेदन करने वालों को सिर्फ 18 महीने का ही वर्क वीज़ा मिलेगा.

यानी 2026 में पढ़ाई शुरू करने वाले छात्रों को कनाडा में UK के मुकाबले लगभग दोगुनी अवधि तक काम करने का मौका मिलेगा.

सबसे बड़ा फर्क: काम का अनुभव किसे गिना जाता है?

UK में पढ़ाई के बाद मिले ग्रेजुएट वीज़ा पर किया गया काम ILR के लिए नहीं गिना जाता. एक्सपीरियंस को ILR में गिने जाने के लिए छात्र को ग्रेजुएट वीज़ा से Skilled Worker Visa पर जाना पड़ता है, जिसके लिए सरकार-मान्यता प्राप्त नियोक्ता से स्पॉन्सरशिप और न्यूनतम वेतन शर्तें पूरी करनी होती हैं. इसके बाद ही UK में ILR के लिए समय गिनना शुरू होता है.

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वहीं कनाडा में PGWP पर किया गया काम सीधे PR की पात्रता में जुड़ता है. किसी भी कनाडाई नियोक्ता के साथ TEER 0, 1, 2 या 3 श्रेणी की कुशल नौकरी में एक साल का अनुभव मिलने पर छात्र Canadian Experience Class (CEC) के जरिए PR के लिए आवेदन कर सकता है.

उदाहरण से समझिए फर्क

UK का रास्ता:

22 साल की उम्र में UK गई एक छात्रा को

1 साल पढ़ाई

18 महीने ग्रेजुएट वीज़ा

फिर 5 साल Skilled Worker Visa के बाद करीब 7–8 साल में ILR मिल पाता है.
अगर नियम बदले, तो यह समय 12 साल से ज्यादा भी हो सकता है.

कनाडा का रास्ता:

22 साल में कनाडा गया छात्र

1 साल पढ़ाई

1 साल काम

फिर Express Entry के जरिए 25 साल की उम्र तक PR हासिल कर सकता है.

हालांकि कनाडा में भी इमिग्रेशन कटौती, स्टूडेंट परमिट लिमिट और सख्त नियम लागू हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद पढ़ाई से स्थायी निवास तक का रास्ता UK की तुलना में ज्यादा आसान और तेज़ है. इसी वजह से, जो छात्र स्टडी-टू-इमिग्रेट का साफ और भरोसेमंद रास्ता चाहते हैं, उनके लिए कनाडा आज भी टॉप डेस्टिनेशन बनकर सामने आया है.

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