ट्रंप की वापसी बनी जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे का कारण? इस गलती से चली गई कनाडा की सत्ता

जस्टिन ट्रूडो के कनाडा की सत्ता से बाहर होने के यूं तो कई कारण बताए जा रहे हैं जिसमें पार्टी की आंतरिक बगावत भी शामिल है. लेकिन ट्रूडो के इस्तीफे के पीछे एक वजह अमेरिका की सत्ता में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी मानी जा रही है.

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फोटो- डोनाल्ड ट्रंप के साथ जस्टिन ट्रूडो फोटो- डोनाल्ड ट्रंप के साथ जस्टिन ट्रूडो

शोएब राणा

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 7:04 PM IST

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सोमवार 6 जनवरी से ही उनके इस्तीफे देने की खबरों ने जोर पकड़ा हुआ था, इसी बीच उन्होंने प्रधानमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर दिया. जस्टिन ट्रूडो के कनाडा की सत्ता से बाहर होने के यूं तो कई कारण बताए जा रहे हैं जिसमें पार्टी की आंतरिक बगावत भी शामिल है. लेकिन ट्रूडो के इस्तीफे के पीछे एक वजह अमेरिका की सत्ता में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी भी मानी जा रही है.

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दरअसल, जबसे ट्रंप ने अमेरिका का चुनाव जीता है तबसे ही वह जस्टिन ट्रूडो को ट्रोल कर रहे थे. कभी ट्रंप अपनी दूसरी सरकार में कनाडा के ऊपर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे थे तो कभी वह कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बताते हुए जस्टिन ट्रूडो को वहां का गवर्नर बता रहे थे. 

चुनाव में जीत के बाद एक बार भी ट्रंप ने ट्रूडो को एक राष्ट्र का नेता नहीं बताया बल्कि हर बार उन्हें अमेरिकी राज्य का गवर्नर कहकर संबोधित किया. इतना ही नहीं, जब ट्रूडो अमेरिका में ट्रंप से मिलने पहुंचे तो ट्रंप ने मुलाकात की फोटो शेयर की थी और इसमें भी ट्रूडो को 'अमेरिकी राज्य कनाडा' का गवर्नर बताया था.

ट्रूडो के इस्तीफे का ट्रंप ने लिया क्रेडिट

खास बात है कि जैसे ही कनाडा के प्रधानमंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया तो ट्रंप ने कनाडा को अपना 51वां राज्य बनाने का ऑफर भी दे दिया. ट्रंप ने ट्रूडो के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर की.

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डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट में कहा, "कनाडा में मौजूद काफी लोग देश को अमेरिका के 51वें स्टेट के तौर पर चाहते हैं. अमेरिका अब भारी व्यापार घाटे और सब्सिडी को सहन नहीं कर सकता, जिसकी कनाडा को अपनी अर्थव्यवस्था को बचाए रखने के लिए जरूरत है. जस्टिन ट्रूडो को यह बात पता थी और उन्होंने इस्तीफा दे दिया."

ट्रूडो के इस्तीफे के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "अगर कनाडा, अमेरिका में शामिल होता है, तो कोई टैरिफ नहीं देना होगा, टैक्स बहुत कम हो जाएगा और देश के नागरिक रूस और चीन के जहाजों के खतरों से पूरी तरह सुरक्षित होंगे. साथ-साथ हम महाने देश बन सकते हैं."

क्या सच में ट्रंप की वजह से सत्ता से बाहर हो गए ट्रूडो ?

जबसे ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतकर सत्ता में वापस आए हैं तबसे कहीं न कहीं जस्टिन ट्रूडो उनके सामने कमजोर पड़ते हुए नजर आ रहे थे. चुनाव जीतने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने चाहे उन्हें 51वें राज्य का गवर्नर बताया हो या कनाडा पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाने की धमकी दी हो, किसी भी बात पर ट्रूडो सख्त नजर नहीं आए. ना ही उन्होंने इस बारे में खुलकर कोई अपनी बात ही रखी.

ट्रूडो की पार्टी के नेता चाहते थे कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों का खुलकर सामना करना चाहिए. कहीं न कहीं उनकी पार्टी के नेताओं को भी ट्रंप के सामने ट्रूडो काफी कमजोर नजर आने लगे थे. जबकि ट्रंप के चुनाव जीतने से पहले ट्रूडो खुलकर ट्रंप की आलोचनाएं भी करते रहे हैं, लेकिन जैसे ही ट्रंप ने चुनाव जीता, वैसे ही ट्रूडो ने ना सिर्फ उन्हें बधाई दी बल्कि मुलाकात भी की.

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यही वजह थी कि धीरे-धीरे उनके मंत्रिमंडल से इस्तीफे आने शुरू हो गए और सबसे बड़ा झटका ट्रूडो को उस समय लगा जब कनाडा की उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने भी इस्तीफा दे दिया. क्रिस्टिया फ्रीलैंड के इस्तीफे देने का कारण भी ट्रूडो का टैरिफ वाले मामले में ट्रंप के साथ अच्छी तरह से डील नहीं कर पाना था. रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा ही कुछ मानना सिर्फ ट्रूडो की पार्टी के नेताओं का ही नहीं बल्कि काफी संख्या में कनाडा के आम नागरिकों का भी था.  
 
दरअसल, वर्तमान में कनाडा की अर्थव्यवस्था अच्छी हालत में नहीं है. कनाडा में एक तरफ लगातार महंगाई बढ़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी भी तेजी से बढ़ रही है. ट्रूडो की लिबरल पार्टी के खिलाफ कंजरवेटिव पार्टी ने इसे बड़ा मुद्दा भी बनाया हुआ है. कनाडा में कोविड के बाद बेरोजगारी दर लगभग 6.5 फीसदी तक पहुंच गई है. कनाडा में घरों की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है, जिसने आम लोगों को ट्रूडो के खिलाफ खड़ा कर दिया है.

अगर ट्रंप सत्ता में आने के बाद 25 फीसदी टैरिफ लगा देते हैं तो इससे हालत और ज्यादा बिगड़ सकती है. इसी वजह से कनाडा के लोगों की चाहत है कि देश का कोई ऐसा नेता हो जो मजबूती के साथ ट्रंप के साथ बातचीत कर पाए जो ट्रूडो नहीं कर पा रहे थे.

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कनाडा के एंटी अमेरिकन लोगों में वाहवाही का मौका भी छोड़ा

हालांकि, अगर जस्टिन ट्रूडो चाहते और मजबूती के साथ अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातों का सामना करते तो शायद वह कनाडा के उन लोगों में अपनी पकड़ और ज्यादा मजबूत बना सकते थे जो एंटी अमेरिकन हैं, लेकिन इसके उलट जब ट्रंप ने ट्रूडो को अमेरिका के 51वें राज्य का गवर्नर बताया तो बाद में ट्रूडो ने हंसते हुए यह बात टाल दी थी.

अमेरिका की सत्ता में जब डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन आए तो ट्रूडो के साथ उनके राजनीतिक संबंध ठीक रहे. दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध चल रहे थे लेकिन इसके उलट जब रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में थे तो उस समय भी वह कनाडा को नाटो ग्रुप के उस सदस्य के रूप में देख रहे थे जो संयुक्त सैन्य गठबंधन को लेकर गंभीर नहीं है.

अब ट्रंप की पहली सरकार में जब रिश्ते इतने खराब रहे तो डोनाल्ड ट्रंप की वापसी ने न सिर्फ कनाडा की सरकार बल्कि वहां के लोगों की भी चिंता बढ़ा दी. इसी का नतीजा ये रहा कि जस्टिन ट्रूडो को आखिरकार अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया.

प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद क्या बोले जस्टिन ट्रूडो?

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को राजधानी ओटावा में एक प्रेस वार्ता की. उन्होंने कहा कि अब कनाडा अगले चुनाव में एक वास्तविक विकल्प का हकदार है, और यह उनके लिए साफ हो गया है कि अगर उन्हें आंतरिक लड़ाई लड़नी पड़ रही है, तो वह उस चुनाव में सबसे अच्छा विकल्प नहीं हो सकते हैं. 

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जस्टिन ट्रूडो ने अपने संबोधन में कहा कि एक नया प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी का नेता अगले चुनाव में अपने मूल्यों और आदर्शों को लेकर जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि वह आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया को देखने के लिए उत्साहित हैं.

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