बांग्लादेश चुनाव से पहले हिंसा में जबरदस्त उछाल... मॉब लिंचिंग और मानवाधिकार उल्लंघन के मामले बढ़े

बांग्लादेश में आम चुनाव से ठीक 12 दिन पहले कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. मानवाधिकार संस्था MSF की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में मॉब लिंचिंग, अल्पसंख्यकों पर हमले और कस्टोडियल मौतों के आंकड़े दोगुने हो गए हैं, जिससे अंतरिम सरकार की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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बांग्लादेश के अंदर हिंसा में बढ़ोतरी (File Photo: ITG) बांग्लादेश के अंदर हिंसा में बढ़ोतरी (File Photo: ITG)

आशुतोष मिश्रा

  • ढाका,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST

बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए मतदान से 12 दिन पहले हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हुई है. मानवाधिकार सोंग्सकृति फाउंडेशन (MSF) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी महीने में मॉब लिंचिंग के मामलों में 21 लोग मारे गए, जबकि दिसंबर 2025 में यह संख्या 10 थी. इस दौरान चुनावी हिंसा में 4 लोगों की मौत हुई और 5 से ज्यादा लोग घायल हुए. 

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अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भी बढ़ी है, जिसमें हिंदू मंदिरों और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने की 21 घटनाएं दर्ज की गईं. पुलिस और न्यायिक हिरासत में होने वाली मौतों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है. 

प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी के चलते जेलों में मानवीय गरिमा और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ के मामले सामने आए हैं.

मॉब लिंचिंग और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले

बांग्लादेश में जनवरी के दौरान भीड़ द्वारा की जाने वाली हत्याओं (मॉब लिंचिंग) में अचानक उछाल आया है. MSF फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर की तुलना में जनवरी में ऐसी घटनाएं दोगुनी हो गई हैं. अल्पसंख्यकों को भी बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है. दिसंबर में मंदिरों में तोड़फोड़ या चोरी की सिर्फ 6 घटनाएं सामने आई थीं, जो जनवरी में बढ़कर 21 तक पहुंच गई हैं. इसके अलावा, महीने भर में 57 ऐसी लाशें बरामद हुई हैं, जिनकी पहचान तक नहीं हो पाई है, जो सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है.

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हिरासत में मौतें और प्रशासन पर सवाल

जेलों और न्यायिक हिरासत में कैदियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है. जनवरी में कस्टडी में मरने वालों का आंकड़ा 15 तक पहुंच गया है, जिनमें से ज्यादातर मौतें इलाज में लापरवाही और अमानवीय व्यवहार की वजह से हुईं. हाल ही में अवामी लीग के पूर्व नेता और कलाकार प्रलय चाकी की न्यायिक हिरासत में इलाज के दौरान मौत हो गई. उनके परिवार ने इस नुकसान के लिए शासन और प्रशासन की घोर लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है.

चुनावी हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराध

जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, राजनीतिक स्थिरता खतरे में पड़ती दिख रही है. चुनावी हिंसा में मरने वालों की तादाद दिसंबर में सिर्फ 1 थी, जो जनवरी में बढ़कर 4 हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा की 250 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें 34 रेप और 11 गैंग रेप के मामले शामिल हैं. MSF ने सरकार से इन सभी गंभीर मामलों की निष्पक्ष जांच करने और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने की पुरजोर अपील की है.

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