बांग्लादेश का तख्तो ताज तारिक रहमान को... BNP को दो-तिहाई बहुमत, जमात-ए-इस्लामी का सफाया

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 13वें आम चुनाव में बहुमत हासिल कर 20 साल बाद सत्ता में वापसी का बिगुल फूंक दिया है. सियासी जंग में जमात-ए-इस्लामी पीछे रही और संवैधानिक सुधार वाले जुलाई चार्टर को व्यापक समर्थन मिला है.

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तारिक़ रहमान की पार्टी ने बांग्लादेश चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है. (Photo: AP) तारिक़ रहमान की पार्टी ने बांग्लादेश चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:55 AM IST

सत्ता के लिए 20 साल का इंतज़ार खत्म करते हुए, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 13वें आम चुनावों में बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अगली सरकार बनाने के लिए तैयार है. यह एक अहम जनादेश है, जो उथल-पुथल से जूझ रहे देश की सियासी दिशा में एक बड़ी तब्दीली की तरफ इशारा करता है. 

तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी ने आखिरी बार 2001 में चुनाव जीता था. आज पार्टी ने जीत का ऐलान कर दिया है क्योंकि गिनती के ट्रेंड्स में भारी जीत का इशारा मिल रहा था, जिससे दो दशकों के बाद सत्ता में उसकी वापसी पक्की हो गई.

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इस बीच, जमात-ए-इस्लामी को बड़ा झटका लगा है, जो नतीजों के धीरे-धीरे आने के बावजूद डबल-डिजिट सीटों तक ही सीमित रही. स्थानीय मीडिया ने बताया कि सुबह-सुबह हुई वोटिंग में BNP गठबंधन ने 209 सीटें जीतीं.

कैसा रहा जमात-ए-इस्लामी का प्रदर्शन?

BNP के प्रदर्शन ने उसे सिंपल मेजॉरिटी के लिए ज़रूरी 151 सीटों की लिमिट से आगे पहुंचा दिया, जिससे पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए मज़बूत स्थिति में आ गई. कई चुनाव क्षेत्रों में वोटों की गिनती जारी रही, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड्स से पता चला कि फ़ाइनल टैली में बड़े बदलाव की गुंजाइश कम है. सुबह करीब 4 बजे तक, जमात-ए-इस्लामी ने 56 सीटें जीत ली थीं.

बांग्लादेश के रेफरेंडम के अनऑफिशियल नतीजों से जुलाई चार्टर के लिए लोगों के मज़बूत सपोर्ट का भी पता चलता है, जो 2024 के विद्रोह से बना एक सुधार डॉक्यूमेंट है जिसमें बड़े संवैधानिक बदलावों का प्रस्ताव है.

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The Daily Star के मुताबिक, गिने गए वोटों में से करीब 72.9 फीसदी चार्टर को अपनाने के पक्ष में थे, जबकि 27.1 परसेंट इसके खिलाफ थे. 

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जगह-जगह से हिंसा की खबरें

लोकल मीडिया के मुताबिक, बांग्लादेश के कई हिस्सों में चुनाव के दौरान हिंसा की भी घटनाएं सामने आईं. वोटिंग से जुड़ी झड़पों में 70 से ज़्यादा लोग घायल बताए गए हैं.

बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने कहा कि 14 अलग-अलग घटनाओं में करीब 72 लोग घायल हुए, जिनमें से कई पोलिंग स्टेशन के पास या अंदर हुए. पुलिस ने इस हंगामे के सिलसिले में कम से कम नौ लोगों को हिरासत में लिया. सबसे बुरी हिंसा नोआखली जिले के हटिया में हुई, जहां BNP और नेशनल सिटीजन पार्टी के समर्थकों के बीच हुई झड़प में 31 लोग घायल हो गए.

वोटिंग सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और नौ घंटे तक बिना रुके चलती रही. वोटरों ने दो अलग-अलग बैलेट पेपर इस्तेमाल किए- एक पार्लियामेंट्री चुनाव के लिए और दूसरा रेफरेंडम के लिए, जिन्हें देश भर के 42,659 पोलिंग स्टेशनों पर ट्रांसपेरेंट बैलेट बॉक्स में रखा गया था.

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देश के 300 में से 299 चुनाव क्षेत्रों में चुनाव हुए. शेरपुर-3 में एक पार्लियामेंट्री उम्मीदवार की मौत के बाद वोटिंग टाल दी गई. बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन (EC) के मुताबिक, देश भर में 60.69 फीसदी वोटिंग हुई, जिसमें पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल 80.11 परसेंट और कुल वैलिड वोट रेट 70.25 परसेंट रहा. कई वोटरों ने कहा कि 2008 के पार्लियामेंट्री चुनावों के बाद यह पहला शांतिपूर्ण और खुशी वाला चुनाव था जो उन्होंने देखा.

वोटों की गिनती के बीच, जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के चीफ, शफीकुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी अपने फायदे के लिए 'विपक्ष की राजनीति' नहीं करेगी, जिससे गिनती जारी रहने पर चुनाव के नतीजों को मानने का संकेत मिला. उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, "हम पॉजिटिव पॉलिटिक्स करेंगे."

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टाइट सिक्योरिटी के बीच वोटिंग

पूरे देश में सिक्योरिटी कड़ी कर दी गई थी, कई पोलिंग सेंटर्स पर आर्मी के जवान तैनात थे और बड़े शहरों में पुलिस पेट्रोलिंग दिख रही थी. ज़्यादातर सेंटर्स पर CCTV कैमरे लगाए गए थे, जिसमें वोटिंग बूथ के पास भी शामिल थे. हालांकि, कुछ जगहों पर कम्पार्टमेंट के अंदर कैमरे नहीं थे.

चुनाव अधिकारियों ने बताया कि बढ़ी हुई सिक्योरिटी और मॉनिटरिंग से वोटर्स का भरोसा बढ़ाने में मदद मिली. अधिकारियों ने चुनाव से जुड़ी हिंसा से जुड़ी किसी मौत की खबर नहीं दी. सिक्योरिटी पक्का करने के लिए आर्म्ड फोर्सेज़, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश और पुलिस के करीब 10 लाख लोगों को तैनात किया गया था.

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बांग्लादेश का यह चुनाव 2024 की सियासी उथल-पुथल और तीन दशकों में पहली बार बैलेट से अवामी लीग की गैरमौजूदगी के बाद पहला नेशनल वोट था.

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