'सरकार मानती है कि ये घटनाएं सांप्रदायिक नहीं, तो...', बांग्लादेश की रिपोर्ट पर अल्पसंख्यक नेता ने उठाए सवाल

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसक घटनाओं के बीच अब अंतरिम सरकार का बयान आया है. मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली सरकार ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक घटनाओं को सांप्रदायिक हिंसा मानने से ही इनकार कर दिया है.

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बांग्लादेश में हिंसक मामलों पर यूनुस सरकार ने रिपोर्ट जार की है. (Photo: ITG) बांग्लादेश में हिंसक मामलों पर यूनुस सरकार ने रिपोर्ट जार की है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:44 AM IST

शेख हसीना की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन और मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार के गठन के बाद से ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं. एक के बाद एक हिंदुओं की लिंचिंग और हत्या जैसी घटनाओं को लेकर दुनियाभर में किरकिरी के बाद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार इन्हें सांप्रदायिक हिंसा मानने से ही इनकार कर रही है.

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि पिछले साल (साल 2025) देश में अल्पसंख्यकों के साथ हुई अधिकतर घटनाएं आपराधिक थीं और वह सांप्रदायिक कारणों से प्रेरित नहीं थीं. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की अगुवाई कर रहे मोहम्मद यूनुस के कार्यालय की ओर से जारी बयान में पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देकर कहा गया है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ कुल 645 घटनाएं हुईं. इनमें से 71 घटनाओं के पीछे ही सांप्रदायिक कारण थे.

यूनुस के कार्यालय ने कहा है कि हर घटना चिंता का विषय है, लेकिन आंकड़े एक स्पष्ट और साक्ष्य-आधारित तस्वीर पेश करते हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक मंदिरों में तोड़फोड़ की 38, आगजनी की आठ, चोरी की एक, हत्या की एक घटना हुई है. 23 अन्य घटनाएं हुई हैं, जिनमें मूर्तियां तोड़ने की धमकी, उकसाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट और पूजा मंडपों को नुकसान पहुंचाने जैसे मामले शामिल हैं. इन 71 में से 50 मामलों में पुलिस केस दर्ज हुए और उतनी ही गिरफ्तारियां भी हुईं. अन्य 574 घटनाओं का धर्म से कोई वास्ता नहीं था.

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुताबिक पड़ोसियों के साथ विवाद की 51, भूमि से जुड़े संघर्ष के 23, चोरी के 106, पुरानी दुश्मनी के 26, बलात्कार के 58 और अप्राकृतिक मौत के 172 मामले पिछले एक साल में सामने आए हैं. पुलिस ने इनमें से 390 मामलों में केस दर्ज किए, अप्राकृतिक मौत के 154 मामलों में रिपोर्ट दाखिल की और 498 गिरफ्तारियां कीं. 30 मामलों में अतिरिक्त कार्रवाई की गई. अंतरिम सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा है कि सभी अपराध गंभीर हैं और जवाबदेही होनी चाहिए.

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रिपोर्ट पर उठे सवाल

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (बीएचबीसीयूसी) के नेता काजल देबनाथ ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक घटनाओं को गैर सांप्रदायिक बताए जाने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार अगर मानती है कि ये घटनाएं सांप्रदायिक नहीं हैं, तो क्या कोई भी व्यक्ति अपने हाथ में कानून ले सकता है? काजल देबनाथ ने कहा कि इस तरह के बयान अपराधियों को प्रोत्साहित कर सकते हैं. बीएचबीसीयूसी ने इस महीने की शुरुआत में यह दावा किया था कि आम चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा खतरनाक स्तर पर बढ़ रही है.

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बांग्लादेश में कितने हिंदू

बांग्लादेश में साल 2022 की जनगणना के मुताबिक लगभग 1.31 करोड़ हिंदू रहते हैं. बांग्लादेश की कुल आबादी में हिंदुओं की भागीदारी करीब 8 प्रतिशत है. बांग्लादेश में लगभग 10 लाख बौद्ध, 5 लाख ईसाई के साथ ही करीब दो लाख सिख, आदिवासी और अन्य धर्मों के लोग रहते हैं. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक घटनाओं पर 9 जनवरी को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि इस तरह की सांप्रदायिक घटनाओं से तेजी और सख्ती के साथ निपटा जाना चाहिए.
 

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