बांग्लादेश: पेड़ से लटका मिला हिंदू व्यक्ति का शव, मंदिर की रखवाली करता था

बांग्लादेश में एक हिंदू मंदिर के केयरटेकर का शव पेड़ से लटका हुआ मिला. घटना के बाद एक अल्पसंख्यक समूह ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

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जानकारी के मुताबिक शव तब बरामद किया गया जब वह डिकम्पोज़्ड होना शुरू हो गया था. (Photo: Representational) जानकारी के मुताबिक शव तब बरामद किया गया जब वह डिकम्पोज़्ड होना शुरू हो गया था. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:55 AM IST

बांग्लादेश में लापता हुए एक हिंदू मंदिर के केयरटेकर का शव तीन दिन बाद एक पेड़ से लटका हुआ मिला. जिसके बाद से पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. बताया जा रहा है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह आत्महत्या है या हत्या. इस बीच एक अल्पसंख्यक समूह ने घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

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बांग्लादेश हिन्दू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल (बीएचबीसीयूसी) ने बताया कि चटोग्राम जिले के दोहाजारी क्षेत्र के निवासी 40 वर्षीय नयन साधु, शिवकाली मंदिर में केयरटेकर के रूप में कार्यरत थे.

पुलिस और स्थानीय निवासियों के अनुसार, 19 अप्रैल की देर शाम दो अज्ञात व्यक्ति नयन को अपने साथ ले गए. इसके तीन दिन बाद उसका शव गांव के बाहरी इलाके में एक पहाड़ी क्षेत्र में पेड़ से लटका हुआ मिला.

जानकारी के मुताबिक शव तब बरामद किया गया जब वह डिकम्पोज़्ड होना शुरू हो गया था. एक बयान में काउंसिल ने  नयन की हत्या के दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है. साथ ही यूनिटी काउंसिल ने इस घटना की कड़ी निंदा भी की.

बांग्लादेश पूजा सेलिब्रेशन काउंसिल की कॉक्स बाजार इकाई के महासचिव जॉनी धर ने कहा कि नयन के लापता होने के तीन दिन बाद शव बरामद किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि उसकी हत्या की गई थी.

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न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बीएचबीसीयूसी के वरिष्ठ सदस्य काजल देबनाथ ने कहा, “हम यह बिल्कुल नहीं समझ पा रहे हैं कि एक दूरदराज इलाके में स्थित छोटे मंदिर के एक साधारण केयरटेकर की हत्या के पीछे क्या मकसद हो सकता है."

वहीं, पुलिस ने जानकारी दी कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के सही कारण का पता लगाया जा सके. मृतक की पत्नी द्वारा 19 अप्रैल को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद जांच शुरू की गई थी.

ससे पहले, 9 अप्रैल को काउंसिल ने कहा था कि बांग्लादेश में इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं हुई हैं.

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