18 महीनों की लंबी राजनीतिक अस्थिरता के बाद भारत के पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश में आम चुनाव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. अब 72 घंटे से भी कम समय में मतदान शुरू होगा. इसी मतदान के साथ देश की जनता उस संविधान संशोधन पर भी फैसला देगी जिसकी मांग शेख हसीना की सत्ता हटाने के लिए शुरू हुए जुलाई आंदोलन के बाद उठी थी.
बांग्लादेश चुनाव आयोग के मुताबिक, देशभर में मतदान केंद्र तैयार हैं. 12 फरवरी को मतदान होगा और 299 संसदीय सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. शेरपुर जिले में जमात उम्मीदवार के निधन के बाद कुल 299 सीटों पर ही वोटिंग होगी. सुबह साढ़े 7.30 बजे मतदान शुरू होगा और बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराया जाएगा. उसी दिन शाम करीब साढ़े 4.30 बजे मतगणना शुरू होगी और आयोग का अनुमान है कि परिणाम आने में 24 घंटे तक का समय लग सकता है.
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश चुनाव में अब सिर्फ 72 घंटे, कई जगहों पर चुनावी हिंसा, BNP-जमात के कार्यकर्ता भिड़े
10 फरवरी की सुबह साढ़े 7.30 बजे चुनाव प्रचार बंद हो जाएगा. देश में कुल 12 करोड़ 76 लाख 95 हजार मतदाता हैं जिनमें 6 करोड़ 28 लाख महिलाएं शामिल हैं. 300 सीटों पर कुल 1981 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 78 महिलाएं हैं.
बांग्लादेश में हालात कैसे हैं?
बांग्लादेश लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, भीड़ हिंसा, राजनीतिक टकराव और खराब कानून व्यवस्था से जूझ रहा है. भ्रष्टाचार और बेहतर शासन जैसे मुद्दे जनता के लिए अहम हैं. वहीं, अल्पसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा और मॉब लिंचिंग की घटनाएं भी चिंता का विषय बनी रही हैं. दीपू दास की हत्या जैसी घटनाएं अभी भी याद की जाती हैं. ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षा की गारंटी चाहता है और उनका कहना है कि माहौल सुरक्षित हुआ तभी वे मतदान में हिस्सा लेंगे.
किन दलों के बीच है चुनावी मुकाबला?
इन तमाम चुनौतियों के बीच देश को स्थिर सरकार की जरूरत महसूस की जा रही है, इसलिए यह चुनाव लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है. 2026 का चुनाव लगभग द्विध्रुवीय हो चुका है. शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद मुकाबला मुख्य रूप से BNP और कट्टरपंथी दल जमात ए इस्लामी के बीच सिमट गया है.
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश में शेख हसीना के करीबी हिंदू नेता की हिरासत में मौत, कस्टोडियल डेथ पर उठे सवाल
जुलाई आंदोलन के छात्र नेता नाहिद इस्लाम की नेशनल सिटिजंस पार्टी ने जमात के साथ गठबंधन कर 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. वहीं पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP नेता तारिक रहमान ने वापसी के बाद पार्टी की कमान संभालते हुए नई उम्मीदें जगाई हैं.
भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत
दोनों प्रमुख दल पड़ोसी देशों, खासकर भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दे रहे हैं, हालांकि इन दोनों ही दलों के साथ अतीत में रिश्ते हमेशा सहज नहीं रहे. इस बीच कई अंतरराष्ट्रीय संगठन चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में ढाका पहुंच चुके हैं. दक्षिण एशिया के इस महत्वपूर्ण देश में यह चुनाव सिर्फ नई सरकार ही नहीं तय करेगा, बल्कि राजनीतिक स्थिरता, लोकतंत्र और भविष्य की दिशा भी निर्धारित करेगा.
आशुतोष मिश्रा