'जमात-ए-इस्लामी पर बैन लगना चाहिए...', बांग्लादेश चुनाव के बीच तसलीमा नसरीन का बड़ा बयान

तस्लीमा नसरीन ने चेतावनी दी कि अगर अवामी लीग पर प्रतिबंध जारी रहा, तो कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी मुख्य विपक्षी दल बन सकता है. उन्होंने वंशवादी और धर्म आधारित राजनीति का विरोध करते हुए धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व की मांग की.

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तस्लीमा नसरीन ने धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व पर जोर दिया. (Photo:ITG) तस्लीमा नसरीन ने धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व पर जोर दिया. (Photo:ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

बांग्लादेश में आज आम चुनाव के लिए 299 सीटों पर मतदान हो रहा है. इस बीच प्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन ने वहां की राजनीतिक स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर देश में धर्मनिरपेक्ष दलों पर प्रतिबंध जारी रहा, तो कट्टरपंथी संगठन 'जमात-ए-इस्लामी' मुख्य विपक्षी दल बनकर उभर सकता है.

तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बांग्लादेश के भविष्य को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के मुख्य विपक्षी दल बनने को लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए बड़ा झटका बताया है.

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तसलीमा नसरीन ने पोस्ट में लिखा, 'अगर बीएनपी जीतती है, तो बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार जमात-ए-इस्लामी मुख्य विपक्षी दल बन जाएगी. ऐसा सिर्फ इसलिए होगा क्योंकि अवामी लीग पर बैन लगा दिया गया है.'

वंशवादी-धर्म आधारित राजनीति पर विरोध जताया

लेखिका ने आगे कहा, 'मुझे उम्मीद है कि चुनी हुई सरकार अवामी लीग पर से बैन हटा देगी, ताकि विपक्ष धर्मनिरपेक्ष या वामपंथी दलों से आए, न कि किसी धार्मिक दल से. मैं वंशवादी राजनीति और धर्म आधारित राजनीति का विरोध करती हूं.'

उन्होंने कहा कि एक सच्चे धर्मनिरपेक्ष राज्य में, कोई भी राजनीतिक दल धर्म पर आधारित नहीं होना चाहिए. अगर किसी दल पर सैद्धांतिक रूप से बैन लगाना ही है, तो वो जमात-ए-इस्लामी होना चाहिए, न कि धर्मनिरपेक्ष दल.

यह भी पढ़ें: Taslima Nasrin Statement On Islam: 'जब तक इस्लाम है, आतंकवाद भी रहेगा...', बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन का बयान

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धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व पर दिया जोर

तसलीमा ने आखिर में कहा कि बांग्लादेश को वंशवादियों या धर्मगुरुओं की जरूरत नहीं है. बल्कि महिलाओं के अधिकारों, मानवाधिकारों, सार्वभौमिक शिक्षा, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध नए धर्मनिरपेक्ष नेतृत्व की जरूरत है.

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