जानिए अफ्रीकी देश माली में सैन्य विद्रोह की अगुवाई करने वाले कौन हैं, और क्या चाहते हैं?

सैन्य कमांडरों के प्रवक्ता कर्नल-मेजर इस्माइल वागे ने इसके साथ ही राष्ट्रीय कमेटी का ऐलान किया और कहा कि देश को और अस्थिरता में जाने से रोकने के लिए सेना ने ये कदम उठाया है.

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विद्रोह करने वाले नेता विद्रोह करने वाले नेता

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:31 AM IST
  • अफ्रीकी देश माली में सैन्य विद्रोह
  • राजधानी बमाको में हुई फायरिंग
  • प्रधानमंत्री को बनाया गया बंधक

पश्चिम अफ्रीकी देश माली में सैन्य विद्रोह के जरिए सरकार का तख्तापलट हो गया है. मंगलवार शाम और रात को राजधानी बमाको में विद्रोही सैनिकों ने बड़े पैमाने पर फायरिंग की और वहां के राष्ट्रपति निवास और प्रधानमंत्री भवन को घेरकर राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता और प्रधानमंत्री बाउबो सिसे को बंधक बना लिया. उसके बाद राष्ट्रपति कीता ने टीवी पर देश को संबोधित किया और इस्तीफे का ऐलान करते हुए संसद को भंग करने की घोषणा की.

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इसके बाद विद्रोही सैन्य कमांडरों ने देश को संबोधित किया और कहा कि सत्ता पर कब्जा उनका लक्ष्य नहीं. बल्कि राजनीतिक स्थिरता स्थापित करने के लिए उन्होंने ये कदम उठाया. उन्होंने कहा कि व्यवस्था को स्थिर करने के बाद देश में आम चुनाव कराए जाएंगे. सैन्य कमांडरों के प्रवक्ता कर्नल-मेजर इस्माइल वागे ने देश को संबोधित किया.

सैन्य कमांडरों के प्रवक्ता कर्नल-मेजर इस्माइल वागे ने इसके साथ ही राष्ट्रीय कमेटी का ऐलान किया और कहा कि देश को और अस्थिरता में जाने से रोकने के लिए सेना ने ये कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि जनता के हित और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. कर्नल-मेजर इस्माइल वागे के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई और सैन्य कमांडर भी दिखे.

माली में विद्रोह

मंगलवार रात राजधानी बमाको में अराजकता का माहौल रहा. सभी प्रमुख प्रतिष्ठानों पर सैनिकों ने कब्जा कर लिया. सभी प्रमुख नेता हिरासत में ले लिए गए. सीमाएं सील कर दी गईं और रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया. हालांकि, इस दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

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देश को संबोधित करते हुए कर्नल वेग ने कहा कि सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों का हम पालन करेंगे और अंतरराष्ट्रीय शांति सेना अपना काम करती रहेगी.

इस सैन्य तख्तापलट से पहले पिछले महीने भी सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए थे. जिसमें 11 लोगों की जान गई थी. सैन्य तख्तापलट के बाद विद्रोही कार्यकर्ताओं ने राजधानी बमाको के सेंट्रल स्कवेयर पर इकट्ठा होकर जश्न मनाया.

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने माली में जल्द लोकतंत्र की बहाली की अपील की है. संयुक्त राष्ट्र ने विद्रोही सैनिकों से अपील की है कि वे बिना शर्त राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को रिहा करें. हालांकि, फ्रांस ने अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. माली पहले फ्रांस का ही उपनिवेश था और राष्ट्रपति कीता की सरकार को फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों का करीबी माना जाता था.

माली में 2012 में भी एक तख्तापलट हुआ था, उसके बाद कई इलाकों में कट्टरपंथ और आतंकवाद की घटनाएं बढ़ गई थीं.

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