TMC विधायक हुमायूं कबीर को EC का नोटिस... 2002 की वोटर लिस्ट में नाम न होने पर बवाल

हुमायूं कबीर ने बताया कि उन्हें स्पेशल इंक्वायरी रजिस्टर (SIR) की ओर से सुनवाई का नोटिस मिला, जिसके तहत उन्हें कोलकाता के डीपीएस रूबी पार्क स्कूल स्थित सुनवाई केंद्र पर पेश होना था.

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पूर्व आईपीएस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2002 में वह भारत में नहीं थे. (File Photo- ITG) पूर्व आईपीएस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2002 में वह भारत में नहीं थे. (File Photo- ITG)

तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:12 PM IST

पश्चिम बंगाल के देबरा से तृणमूल कांग्रेस विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी हुमायूं कबीर को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत नोटिस जारी किया गया है. यह नोटिस 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज न होने को लेकर भेजा गया है, जिस पर हुमायूं कबीर ने हैरानी और नाराजगी जताई है.

हुमायूं कबीर ने बताया कि उन्हें स्पेशल इंक्वायरी रजिस्टर (SIR) की ओर से सुनवाई का नोटिस मिला, जिसके तहत उन्हें कोलकाता के डीपीएस रूबी पार्क स्कूल स्थित सुनवाई केंद्र पर पेश होना था. उन्होंने कहा, “मुझे SIR का नोटिस मिला है. आज मुझे डीपीएस रूबी पार्क स्कूल जाना पड़ा. चुनाव आयोग के लिए मेरा वोटर आईडी, पैन कार्ड और पासपोर्ट भी पर्याप्त नहीं माने गए, क्योंकि 2002 की वोटर लिस्ट में मेरा नाम नहीं है.”

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पूर्व आईपीएस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2002 में वह भारत में नहीं थे. उस समय वह विदेश मंत्रालय के आदेश पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मिशन के तहत यूरोप में तैनात थे. उन्होंने कहा, “मैं उस दौरान यूएन डिपुटेशन पर यूरोप में पोस्टेड था. मेरे पास उस समय का डिप्लोमैटिक पासपोर्ट भी मौजूद है, जिसकी प्रति मैंने पेश की है.” 

हुमायूं कबीर ने आजतक से बातचीत में बताया कि वह निर्धारित तिथि पर सुनवाई केंद्र पहुंचे और वहां जरूरी दस्तावेज जमा कराए. उन्होंने कहा, “मैं आज सुनवाई के लिए गया था और मैंने अपनी पेंशन रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज जमा किए. यह बेहद हैरान करने वाला है कि मैंने 31 साल तक पुलिस सेवा की, यूएन मिशन के तहत विदेश में देश का प्रतिनिधित्व किया, फिर भी मुझे इस तरह का नोटिस भेजा गया.”

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उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ऐसे व्यक्ति की नागरिकता और मतदाता पहचान पर सवाल खड़े होना, जिसने दशकों तक देश की सेवा की हो, चिंताजनक है. कबीर के मुताबिक, उनके पास सभी वैध सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद 2002 की मतदाता सूची में नाम न होने को आधार बनाकर नोटिस भेजा जाना समझ से परे है.

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