आखिर कहां चले गए अलंकार अग्निहोत्री... आधी रात में सरकारी घर खाली लेकिन नहीं दिया किसी को हैंडओवर!

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफे के बाद आधी रात सरकारी आवास खाली कर दिया. चर्चा है कि बिना चार्ज हैंडओवर दिए ही उन्होंने शहर छोड़ दिया, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह कहां हैं.  वैसे उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है लेकिन यूजीसी नियमों और शंकराचार्य विवाद को लेकर दिए गए बयानों के बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. 

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इस्तीफा देने के बाद अलंकार अग्निहोत्री कहीं बाहर चले गए (Photo: Screengrab) इस्तीफा देने के बाद अलंकार अग्निहोत्री कहीं बाहर चले गए (Photo: Screengrab)

कृष्ण गोपाल राज

  • बरेली ,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:32 AM IST

यूजीसी में जनरल कैटेगरी (सवर्ण वर्ग) के बच्चों के अधिकारों और प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी खींचे जाने से नाराज होकर इस्तीफा देने के बाद से बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री चर्चा में हैं. अब उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. इस्तीफा देने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने आधी रात करीब 12.30 बजे अपना अधिकतर सामान सरकारी आवास से निकलवा लिया. इसके बाद वे खुद भी कार में बैठकर कहीं चले गए हैं. अभी किसी को यह नहीं पता कि वह कहां हैं.  

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हालांकि, अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है. ऐसे में बिना छुट्टी लिए शहर छोड़ने पर भी चर्चा हो रही है. इस बीच प्रशासनिक नियमों के अनुसार उन्हें अभी सिटी मजिस्ट्रेट का विधिवत चार्ज हैंडओवर करना बाकी है. इसी कारण यह माना जा रहा है कि उन्हें एक-दो दिन और बरेली में रहना पड़ सकता है, ताकि औपचारिकताएं पूरी की जा सकें. लेकिन हर कोई यही जानना चाह रहा है कि अलंकार अग्निहोत्री आखिर कहां हैं.

कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री 

अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं. इससे पहले उन्होंने करीब 10 साल आईटी सेक्टर में काम किया है. वे आईआईटी बीएचयू से बीटेक स्नातक हैं. अपने पत्र में उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय का उल्लेख भी किया है। उन्होंने लिखा है कि वे महामना मदन मोहन मालवीय जी के ही आदर्शों से प्रेरित होकर सार्वजनिक सेवा में आए हैं.

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पांच पेज का लिखा है पत्र 

उन्होंने अपने पांच पेज के पत्र में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया. उन्होंने कहा कि वे यूजीसी के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित घटनाओं से आहत हैं. उनका कहना है कि यूजीसी के नए नियमों से सामान्य वर्ग, विशेषकर स्वर्ण समाज के बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि इन नियमों के जरिए सामान्य वर्ग के छात्रों को संदिग्ध या अपराधी की तरह देखा जा रहा है, जिससे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और भूमिहार समाज के छात्र प्रभावित होंगे.

शंकराचार्य और शिष्यों का मुद्दा

अपने पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी खींचे जाने और कथित मारपीट का भी जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि चोटी और शिखा ब्राह्मणों और साधु-संतों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हैं. उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज का अपमान हैं और इससे यह संदेश जाता है कि प्रशासन और सरकार साधु-संतों और ब्राह्मण समाज के प्रति संवेदनशील नहीं है. उन्होंने खुद को ब्राह्मण बताते हुए कहा कि इस घटना ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया.

इस्तीफे के साथ उन्होंने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि उन्हें जिलाधिकारी के आवास पर करीब 45 मिनट तक जबरन रोके रखा गया. उनका आरोप था कि बातचीत के बहाने उन्हें वहां बैठाए रखा गया और मानसिक दबाव बनाया गया. अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी दावा किया कि लखनऊ से आए एक फोन कॉल में दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने आपत्तिजनक टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि फोन पर कथित तौर पर कहा गया कि ब्राह्मण के बहुत दिमाग खराब हो रहे हैं, इसे यहीं बिठा लो.  उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा. इन आरोपों के बाद प्रशासन पर सवाल खड़े होने लगे और पूरे प्रदेश में इस प्रकरण की चर्चा शुरू हो गई.

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प्रशासन ने किया आरोपों का खंडन

सिटी मजिस्ट्रेट के आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत अपना पक्ष रखा. एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने अलंकार अग्निहोत्री के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट को सामान्य प्रशासनिक बातचीत के लिए बुलाया गया था. एडीएम न्यायिक के अनुसार, उस समय एडीएम प्रशासन, एडीएम सिटी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वे स्वयं मौजूद थे. बातचीत सामान्य माहौल में हुई. उन्हें चाय और कॉफी पिलाई गई और मिठाई भी दी गई. प्रशासन का कहना है कि किसी तरह का दबाव, धमकी या बंधक बनाए जाने जैसी कोई स्थिति नहीं थी. देश दीपक सिंह ने स्पष्ट कहा कि डीएम आवास पर किसी को जबरन नहीं रोका गया. हम सभी उनके करियर और स्थिति को समझाने की कोशिश कर रहे थे. डीएम कहीं नहीं गए थे और न ही किसी ने सिटी मजिस्ट्रेट को रोककर रखा. प्रशासन के मुताबिक, लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं.

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