यूपी में SIR 2026 का रिकॉर्ड अपडेट! 86 लाख नए मतदाता, महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा!

यूपी की वोटर लिस्ट में इस बार कुछ ऐसा हुआ है जो पहले कभी नहीं देखा गया. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने लोक भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जो आंकड़े रखे, उन्होंने सबको चौंका दिया है.

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फर्जी वोटरों की अब खैर नहीं (File Photo: PTI) फर्जी वोटरों की अब खैर नहीं (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

उत्तर प्रदेश में नई वोटर लिस्ट तैयार करने का काम बड़े स्तर पर चल रहा है और इसके जो आंकड़े सामने आए हैं, वो काफी चौंकाने वाले हैं. लखनऊ के लोक भवन में  आज (शनिवार) आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि इस बार यूपी में नया रिकॉर्ड बन गया है. 27 अक्टूबर 2025 से अब तक करीब 86.69 लाख लोगों ने नया वोटर बनने के लिए आवेदन किया है. खास बात यह है कि नाम जुड़वाने की इस रेस में महिलाओं ने पुरुषों को भी पीछे छोड़ दिया है.

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महिलाओं की दावेदारी में भारी उछाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिनवा ने आंकड़ों के जरिए बताया कि पिछले दो महीनों यानी 6 जनवरी से 6 मार्च के बीच कुल 70,69,810 लोगों ने नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरा. इनमें महिलाओं के 35,72,603 आवेदन आए, जबकि पुरुषों के 34,96,911 आवेदन मिले. वहीं, थर्ड जेंडर के भी 296 लोगों ने अपना नाम जुड़वाने के लिए आगे बढ़कर आवेदन किया. यदि शुरुआत से अब तक का कुल हिसाब देखें तो 86.69 लाख आवेदन में महिलाओं की संख्या 43.62 लाख और पुरुषों की 43.06 लाख है. यह साफ दिखाता है कि इस बार महिलाओं ने वोटर लिस्ट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में पुरुषों को मात दे दी है.

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3.26 करोड़ वोटरों को नोटिस

इसी कड़ी में चुनाव आयोग लिस्ट को पूरी तरह साफ-सुथरा बनाने में भी जुटा है. 6 जनवरी को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में कुल 12.55 करोड़ वोटर थे. जांच के दौरान करीब 3.26 करोड़ वोटरों के डेटा में गड़बड़ी पाई गई. किसी का रिकॉर्ड 2003 के डेटा (SIR) से मेल नहीं खा रहा था, तो कहीं परिवार के सदस्यों के बीच उम्र का अंतर काफी असामान्य था. आयोग ने इन सभी को नोटिस जारी किए. अब तक 93.8% नोटिस बांटे जा चुके हैं और करीब 2.80 करोड़ लोगों की सुनवाई भी पूरी हो चुकी है.

वोटर लिस्ट को एकदम सटीक और साफ-सुथरा बनाने के लिए चुनाव आयोग इस बार पूरी सख्ती बरत रहा है. 6 जनवरी को जब ड्राफ्ट लिस्ट जारी हुई, तब प्रदेश में कुल 12.55 करोड़ वोटर थे. लेकिन जब गहराई से जांच हुई, तो करीब 3.26 करोड़ वोटरों के डेटा में कुछ न कुछ कमी या गड़बड़ी मिली. इनमें से करीब 1.4 करोड़ ऐसे वोटर थे जिनका रिकॉर्ड 2003 के पुराने डेटा (SIR) से मैच नहीं कर रहा था. वहीं, 2.02 करोड़ लोगों के विवरण में नामों की गलती या परिवार के सदस्यों के बीच उम्र का अजीब अंतर जैसे मामले सामने आए. इन सभी को नोटिस जारी कर दिया गया है. अब तक 93.8% नोटिस बांटे जा चुके हैं और करीब 2.80 करोड़ लोगों की सुनवाई भी पूरी कर ली गई है.

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नाम कटवाने और सुधारने का काम

वोटर लिस्ट को अपडेट करने के साथ-साथ गलत नाम हटाने और पुराने कार्ड सुधारने का काम भी तेजी से हुआ है. पिछले दो महीनों में नाम कटवाने के लिए 2.68 लाख आवेदन (फॉर्म-7) मिले. वहीं, करीब 22.55 लाख लोगों ने फॉर्म-8 भरकर अपने कार्ड में सुधार करवाया. इसमें घर का पता बदलना, नाम सही कराना या फोटो बदलवाना जैसे काम शामिल हैं. इस दौरान नवदीप रिनवा ने भरोसा दिया है कि किसी भी व्यक्ति का नाम बिना नोटिस या ठोस वजह के लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा.

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राजनीतिक दलों की शिकायतों का निपटारा

प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए राजनीतिक पार्टियों को भी इसमें शामिल रखा गया. चुनाव आयोग को पार्टियों की तरफ से कुल 92 शिकायतें मिलीं, जिन्हें अब पूरी तरह हल कर दिया गया है. इनमें सबसे ज्यादा 78 शिकायतें समाजवादी पार्टी की थीं. इसके अलावा भाजपा की 8, कांग्रेस की 5 और आम आदमी पार्टी की 1 शिकायत थी.

27 मार्च तक पूरा होगा काम

वोटरों की मदद के लिए आयोग ने हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1950 और 1950 चालू रखे हैं. अभी लगभग 14% मामलों की सुनवाई बाकी है, जिसे 27 मार्च की समय सीमा तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही लोग घर बैठे भी 'Book a call with BLO' सुविधा के जरिए अपने बूथ लेवल अधिकारी से सीधे संपर्क कर सकते हैं.

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