देश के 50 सबसे गर्म शहरों में 26 शहर उत्तर प्रदेश के हैं. इस बीच उत्तर प्रदेश में इन दिनों लोगों को जबरदस्त बिजली कटौती का सामना भी करना पड़ रहा है. गर्मी से लोग पहले ही परेशान हैं, लेकिन यह मुश्किल तब और बढ़ जाती है जब बिजली भी साथ छोड़ दे. 45 डिग्री तापमान में यूपी के लोग बेहाल हैं. लू से बचने के लिए घरों में रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन घरों में भी बिजली की किल्लत बनी हुई है.
यूपी के लगभग हर जिले में हालात ऐसे ही हैं. लखनऊ से लेकर कानपुर तक और हापुड़ से लेकर रामपुर तक लोग भीषण बिजली कटौती से परेशान हैं. लोगों का सवाल है कि जब सरकार दावा कर रही है कि जितनी मांग है, उतनी सप्लाई है तो फिर बिजली क्यों नहीं मिल रही?
मेरठ में बिजली न आने से नाराज लोगों ने मेयर के घर का घेराव किया. वहीं कानपुर देहात में भी हंगामे की स्थिति देखने को मिली. मेडिकल कॉलेज के छात्रों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच लगातार बिजली कटौती हो रही है और हॉस्टल में मुश्किल से 8 से 9 घंटे ही बिजली मिल पा रही है.
यूपी के बिजली मंत्री ए.के. शर्मा का दावा है कि पीक आवर्स में राज्य में बिजली की मांग बढ़कर 32,000 से 33,000 मेगावाट तक पहुंच रही है. वहीं रात 3 बजकर 19 मिनट पर उच्चतम मांग के दौरान 30,276 मेगावाट बिजली सप्लाई की गई.
कर्मचारियों के तबादले
गर्मी के मौसम और बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए उत्तर प्रदेश में संबंधित कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं. वहीं, विद्युत व्यवस्था को सुचारू और बेहतर बनाने के लिए मध्यांचल क्षेत्र में टेक्नीशियनों के तबादले किए गए हैं. बिजली आपूर्ति में आ रही दिक्कतों और बढ़ती शिकायतों के बीच 44 टेक्नीशियनों के तबादले किए गए.
प्रशासन का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य फील्ड स्तर पर कार्यप्रणाली को मजबूत करना और फॉल्ट रिस्पॉन्स टाइम कम करना है. जिन क्षेत्रों में लगातार बिजली संकट और तकनीकी खराबियों की शिकायतें मिल रही थीं, वहां नए टेक्नीशियन तैनात किए जाएंगे. अधिकारियों के मुताबिक, इन तबादलों के बाद उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति में सुधार देखने को मिलेगा.
अखिलेश यादव ने लगाए बीजेपी पर आरोप
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिजली संकट को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बीजेपी की गलत नीतियों की वजह से उत्तर प्रदेश में बिजली संकट पैदा हुआ है.
उन्होंने कहा कि, जनता बिजली विभाग के कनिष्ठ कर्मचारियों या लाइनमैन पर अपना गुस्सा न निकाले. साथ ही कहा कि बिजली विभाग के हजारों संविदा कर्मचारियों की छंटनी के बाद कर्मचारी पहले से ही भारी दबाव में काम कर रहे हैं.
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि इस 'महा विद्युत आपदा' के लिए बीजेपी सरकार, बिजली मंत्री, बीजेपी के सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद, बिजली विभाग के उच्चाधिकारी और भ्रष्ट ठेकेदार जिम्मेदार हैं.
उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए न तो बिजली उत्पादन हेतु कोई नया पावर प्लांट लगाया गया है, न ट्रांसमिशन के लिए नई व्यवस्था की गई है.
घर के बुजुर्गों का रखें ख्याल
अखिलेश यादव ने लोगों से अपील की है कि घर के बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों का खास ख्याल रखें. बिजली आते ही मोबाइल फोन चार्ज कर लें और टॉर्च तैयार रखें. साथ ही सतर्क रहें कि अंधेरे का फायदा उठाकर कोई असामाजिक तत्व आपके वाहन या घर के सामान पर हाथ साफ न कर जाए. पशुओं की देखभाल भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि बिजली की कमी का सीधा असर पीने के पानी पर भी पड़ सकता है, इसलिए पानी पहले से भरकर रखें और गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें.
ऊर्जा मंत्री ने दिया जवाब
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने अखिलेश यादव का जवाब देते हुए एक्स पर लिखा कि, आजकल समाजवादी पार्टी के मुखिया को यूपी की बिजली व्यवस्था बहुत कमजोर दिख रही है. उन्होंने कहा, आईना जब भी उठाया करो, पहले खुद देखो फिर दिखाया करो.
2012-17 में यूपी की बिजली की औसत पीक डिमांड 13000 MW थी, जबकि पिछले चार सालों का औसत है 30000 MW है. एके शर्मा ने बताया, आज यूपी 4 सालों से देश में सबसे ज़्यादा पीक विद्युत आपूर्ति करने वाला प्रदेश बना है.
1947 से 2017 के 70 सालों में आपके द्वारा छोड़े गए लगभग 1.70 लाख मजरों का विद्युतीकरण अब किया गया है. उन्होंने आगे कहा कि, आपके समय से लटकते-टूटते 30 लाख खंभों को नए खंभों से तीन साल में ही बदला गया.
एके शर्मा ने कहा कि 2017 के पहले कुछ चुनिंदा जिलों और गांवों में बिजली आती थी. आज हर गांव, हर नगर, हर जिले, हर दुकान, हर प्रतिष्ठान और सब जगह पर 18 से 24 चौबीस घंटे बिजली दी जा रही है.
आशीष श्रीवास्तव