UP पुलिस का गजब कारनामा, अलीगढ़ में लड़कों को चाकू थमा बताया अपराधी, रिकॉर्ड कर लिया वीडियो

अलीगढ़ में थाना अकराबाद पुलिस का फर्जी एनकाउंटर सामने आया है. दो युवकों को जंगल में ले जाकर उनके हाथ-पैंट में चाकू और मोबाइल रखे गए और उन्हें अपराधी बनाकर जेल भेजा गया. वायरल वीडियो में पुलिस ने उन्हें कैमरे के सामने फंसाया. DSP संजीव तोमर ने कहा कि जांच में वीडियो लगभग 2 माह पुराना पाया गया और पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया. परिजनों ने घटना की जानकारी दी. इस मामले ने पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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चाकू लगाकर अपराधी बनाया. (Photo: Screengrab) चाकू लगाकर अपराधी बनाया. (Photo: Screengrab)

अकरम खान

  • अलीगढ़,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:18 PM IST

अलीगढ़ में थाना अकराबाद पुलिस का गजब कारनामा सामने आया है. पुलिस ने युवकों पर चाकू लगाकर उन्हें अपराधी बना दिया और जेल भेज दिया. पुलिस द्वारा फ़िल्मी अंदाज में युवकों को फंसाने का वीडियो बनाकर किसी व्यक्ति के द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है. वायरल वीडियो में पुलिस ने दो युवकों को जंगल में ले जाकर उनके हाथ में छुरा थमाया. इसी बीच पुलिस ने युवकों के हाथ में छुरे देकर फोटो-वीडियो बनाए और फिर मुल्जिम बनाकर भेज दिया. पुलिस द्वारा किए गए इस कारनामें का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

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क्या बोले DSP?
DSP संजीव तोमर ने जानकारी देते हुए बताया कि वायरल वीडियो की जांच की गई तो यह वीडियो लगभग 2 माह पूर्व मोबाइल लुटेरों को गिरफ्तार करने से संबंधित है. इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन स्थानान्तरित किया गया है, साक्ष्यों के आधार पर पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी.

पीड़ित के परिजनों ने क्या कहा?
पीड़ित युवकों के परिजनों ने बताया कि सूरज गौतम और सोनू को 1 दिसंबर 2025 को हिरासत में लिया गया और जंगल में ले जाकर जेब में मोबाइल और पैंट में चाकू रखे गए. इसके बाद 2 दिसंबर को पुलिस ने “गुडवर्क” के रूप में एनकाउंटर दिखाया.

प्रेस नोट में पुलिस ने बताया था कि नानऊ नहर की पटरी से आरोपियों को पकड़ा गया और उनके पास से चोरी के मोबाइल और अवैध चाकू बरामद हुए. लेकिन वायरल वीडियो में दिन के उजाले में पूरी साजिश स्पष्ट दिख रही है, जिससे पुलिस के दावों पर गंभीर सवाल उठ गए हैं.

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इस घटना ने न सिर्फ पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया है, बल्कि फर्जी एनकाउंटर जैसी कार्रवाइयों के खिलाफ भी चिंता बढ़ा दी है.

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