विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है. इसी कड़ी में बीजेपी नेता ब्रज भूषण सिंह के बेटे और गोंडा से विधायक प्रतीक भूषण सिंह का बयान सामने आया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन नियमों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और इतिहास के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए हैं.
प्रतीक भूषण सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि इतिहास के नाम पर बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को अतीत की बात कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को लगातार ऐतिहासिक अपराधी के रूप में चिन्हित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में उसी वर्ग को प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है, जिस पर अब गहन विवेचना की जरूरत है.
सवर्ण समाज में बढ़ा विरोध, आंदोलन की चेतावनी
दरअसल UGC के नए नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया है. इन नियमों के तहत हर संस्थान में इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर बनाना अनिवार्य किया गया है, जो भेदभाव से जुड़ी शिकायतों का समाधान करेगा. नियमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को पीड़ित वर्ग के रूप में परिभाषित किया गया है.
भाजपा के भीतर भी असंतोष, नेताओं के इस्तीफे की चर्चा
इन्हीं प्रावधानों को लेकर सवर्ण जातियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. कई संगठनों ने इन नियमों का विरोध शुरू कर दिया है और आंदोलन की चेतावनी भी दी है. विवाद इतना बढ़ गया है कि बरेली के एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. UGC के नियमों को लेकर भाजपा के भीतर भी असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं. फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार तूल पकड़ता जा रहा है.
आशीष श्रीवास्तव